कपकोट के एसडीएम पारितोष वर्मा ने बताया कि खातीगांव से ऊपर बुग्यालों में 20 भेड़पालक फंसे हुए बैं। उन्हें खातीगांव लाया जा रहा है। सरमूल में भी कुछ पर्यटक फंसे थे, उन लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
संचार सेवा न होने से सूचनाएं नहीं मिल पा रही
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट पर संचार सेवा काम नहीं करती है। न ही इस रूट पर पढ़ने वाले गांवों में सेटेलाइट फोन की सुविधा है। वर्ष 2013 के जलप्रलय में पिंडारी ट्रैकिंग रूट पर जबरदस्त तबाही मची थी। बावजूद इसके पिंडारी ट्रैकिंग रूट पर संचार नेटवर्क पुख्ता नहीं किया गया।
प्रशासन के पास भी नहीं है पुख्ता जानकारी
सुंदरढूंगा में हताहत, कफनी ग्लेशियर में फंसे ट्रैकरों के बारे में प्रशासन सटीक जानकारी नहीं दे पाया। यह ट्रैकर कब वहां गए, कहां के हैं, ट्रैकिंग की अनुमति ली थी, या नहीं, इसकी भी जानकारी प्रशासन देने में नाकाम रहा। कपकोट के एसडीएम पारितोष वर्मा का कहना है कि शुक्रवार तक इस सब की जानकारी मिल जाएगी। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान ट्रैकरों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने पर लगा हुआ है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे 46 पर्यटकों में से 40 पर्यटकों को सेना ने रेस्क्यू कर लिया है। इनमें से 27 पर्यटक व्यास घाटी से चीनूक हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू करके पिथौरागढ़ लाए गए जबकि दारमा घाटी में फंसे 19 पर्यटकों में से गर्भवती समेत 13 पर्यटकों को सेना ने धारचूला सुरक्षित पहुंचाया। इसके अलावा छह स्थानीय लोगों को भी सेना ने रेस्क्यू किया है। 29 पर्यटक अब भी ढाकर हेलीपेड में फंसे हैं, जिन्हें भी जल्द ही सेना रेस्क्यू करेगी।
जिले उच्च हिमालयी क्षेत्र के दारमा और व्यास घाटी में सड़क मार्ग बंद होने से फंसे 27 पर्यटकों को बृहस्पतिवार को वायु सेना के चीनूक एवं एएलएस हेलीकॉप्टर से नैनीसैनी हवाई पट्टी लाया गया। वहीं सेना के एएलएस हेलिकॉप्टर से दारमा घाटी से एक गर्भवती महिला और चार लोगों को नैनीसैनी लाया गया। तीन बीमार व्यक्तियों समेत सात व्यक्तियों को सेना के हेलीकॉप्टर से हायर सेंटर बरेली पहुंचाया गया। रेस्क्यू कार्य के दौरान डीएम डॉ. चौहान, एसपी लोकेश्वर सिंह, तहसीलदार पंकज चंदोला समेत सेना के अधिकारी नैनीसैनी हवाई पट्टी में मौजूद रहे।
दारमा घाटी में प्रसिद्ध पंचाचूली ग्लेशियर घूमने गए करीब 80 पर्यटक बंद सड़कों के चलते तीन दिन से फंसे थे। बृहस्पतिवार को वायुसेना के एएलएच हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। दारमा घाटी के ढाकर हेलीपेड से सेना के हेलीकॉप्टर ने कुल 42 पर्यटकों में से 13 पर्यटकों को धारचूला पहुंचाया। साथ ही छह स्थानीय लोगों को भी रेस्क्यू किया। 29 पर्यटक अब भी ढाकर हेलीपेड में फंसे हैं। डीएम डॉ. चौहान ने बताया 22 अक्तूबर को भी वायु सेना के एमआई 17 हेलीकॉप्टर से राहत-बचाव अभियान चलाकर फंसे हुए पर्यटकों और लोगों को सुरक्षित निकाला जाएगा।
तीन बीमारों को किया रेस्क्यू
डीएम डॉ. चौहान के अनुरोध पर पर राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर से डेढ़ माह की बीमार बच्ची समेत तीन अन्य बीमार लोगों को हल्द्वानी छोड़ा गया। हेलीकॉप्टर से वड्डा निवासी डेढ़ माह के सार्थक पुत्र दीनू देवी को उपचार के लिए हायर सेंटर हल्द्वानी छोड़ा गया। विगत दिनों जिले में हुई भीषण बारिश के कारण सड़क मार्ग अवरुद्ध होने के चलते एक डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, पुलिस की टीम को दारमा के तिदांग पहुंचाया गया जहां दो शवों का पोस्टमार्टम किया गया।
पर्यटकों ने जताया आभार
दुग्तु में फंसे पर्यटकों सकुशल रेस्क्यू करने पर वायुसेना, जिलाधिकारी ,ग्राम प्रधान दान्तु जमन दताल, महेश दताल और सभी सहयोगी जनों का आभार प्रकट किया। दुग्तु में फंसे 42 पर्यटकों को कुमाऊं स्काउट के पोस्ट इंचार्ज हवलदार गोविंद सिंह के नेतृत्व में सेना के वाहन से आठ किमी दूर ढाकर हेलीपैड पहुंचाया गया। यहां से 13 पर्यटकों को भेजा गया जबकि 29 अब भी यहां फंसे हैं, जिन्हें कल भेजा जाएगा। धारचूला हेलीपेड में पर्यटकों के पहुंचने पर 832 लाइट रेजीमेंट के जवानों ने उनके चाय-नाश्ते की व्यवस्था की।