सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की योजना बना रही है, लेकिन शहर में आंगनबाड़ी केंद्र बदहाली से जूझ रहे हैं। न्यू पटेलनगर फर्स्ट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले चार साल से बदहाल कमरे में संचालित हो रहा है।
पूरी दीवार पर जमी काई और सीलन, आसपास गंदगी का अंबार, पेड़ों की टहनी से आधा ढका केंद्र और बाहर तक दुर्गंध। यह स्थित है न्यू पटेलनगर फर्स्ट में किराये के भवन में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र की। केंद्र के अंदर बैठना तो दूर बाहर खड़ा भी नहीं रहा जा सकता। सड़क से लेकर अंदर केंद्र तक पहुंचने में दुर्गंध से बुराहाल हो जाता है।
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सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की योजना बना रही है, लेकिन शहर में आंगनबाड़ी केंद्र बदहाली से जूझ रहे हैं। न्यू पटेलनगर फर्स्ट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पिछले चार साल से बदहाल कमरे में संचालित हो रहा है। यहां 30 बच्चे पंजीकृत है। जबकि, कई बार बच्चे ज्यादा भी हो जाते हैं। 30 बच्चों के हिसाब से यह कमरा बहुत छोटा है। बच्चे सभी पहुंचे हैं तो पूरा कमरा खचाखच भर जाता है। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका के खड़े रहने की जगह नहीं बचती। आलम यह है कि सड़क से लेकर गली से गुजरते हुए आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने में ही दुर्गंध से बुराहाल हो जाता है।
शुक्रवार को केंद्र पर ताला लगा हुआ था, लेकिन बाहर से ही इसकी स्थिति इतनी खराब थी, कि अंदर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कोरोना के कारण केंद्रों बंद हैं, लेकिन कार्यकर्ता व सहायिका राशन वितरण के लिए पहुंचती हैं। उधर, बंदरवाली गली पथरीबाग स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति तो ठीक थी, लेकिन यहां किराया समय पर नहीं मिलने से कई कार्यकर्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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अच्छी जगह के लिए चहिए ज्यादा किराया
आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सामने किराये की सबसे अधिक समस्या रहती है। केंद्र का संचालन अच्छी जगह पर किया जा सकता है, लेकिन फिर बजट की समस्या आती है। कार्यकर्ताओं को कहना है कि कई बार मकान मालिक किराये को लेकर परेशान करते हैं। मजबूरन कई बार हमें अपनी जेब से पैसे भरने पड़ते हैं।