जेलों में कैदियों की क्षमता भी मानक के अनुसार करने से अपराध पर अंकुश लग सकता है। जेलों में बंदी रक्षकों की भी कमी है। हालांकि प्रदेश स्तर पर जेल प्रशासन जल्द ही कुमाऊं में तीन अत्याधुनिक जेलों के तैयार होने का दावा कर रहा है। इसमें ऊधमसिंह नगर, चंपावत और पिथौरागढ़ जिला शामिल है। अगर ऐसा होता है तो जेल की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है।
डेढ़ माह बाद जेल प्रशासन पर फिर उठे सवाल
डेढ़ माह पहले अल्मोड़ा जिला जेल में रंगदारी कांड का खुलासा होने के बाद यह जेल पूरे प्रदेश में चर्चा में आई थी। जेल प्रशासन के उच्च अधिकारियों को भी उम्मीद थी कि इसके बाद स्थानीय जेल प्रशासन पूरी तरह से सचेत रहेगा और जेल में किसी तरह की आपराधिक वारदात नहीं होगी, लेकिन अल्मोड़ा जिला जेल में फिर से मामला पकड़ में आने के बाद अल्मोड़ा जेल प्रशासन ने साबित कर दिया है कि यहां की जेल कैदियों को सजा देने और सुधारने के लिए नहीं बल्कि उन्हें संरक्षण देने के लिए हैं। यहां आकर कैदी आराम से अपनी उन आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे सकें जिन्हें वह बाहर रहकर नहीं दे सकते। इसी का नतीजा है कि जेल में एक के बाद एक लगातार आपराधिक गतिविधियों के खुलासे हो रहे हैं।
जेल के अंदर से नारकोटिक्स का कारोबार होने की शिकायत पर पौड़ी, कोटद्वार, बड़ोंवाला, देहरादून, ऋषिकेश, बरेली, शाहजहांपुर, अल्मोड़ा जेल में एक साथ छापा मारा गया। अल्मोड़ा जिला जेल से दो कैदियों के पास से एक मोबाइल फोन, एक एयर फोन, एक सिम और 24 हजार की नकदी बरामद हुई। दोनों कैदियों की योजना नशा कारोबार का एक बड़ा नेटवर्क जेल से खड़ा करने की थी।
- अजय सिंह, एसएसपी एसटीएफ, देहरादून।