मुख्यमंत्री इगास (बूढ़ी दिवाली) पर्व पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। उस दिन रविवार है। हालांकि सोमवार एक बजे तक इगास पर्व मनाया जाएगा।
यह है मान्यता
दिवाली के 11 दिन बाद पहाड़ में एक ओर दिवाली मनाई जाती है, जिसे इगास कहा जाता है। इस दिन सुबह मीठे पकवान बनाए जाते हैं और शाम को भैलो जलाकर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद ढोल-दमाऊं की थाप पर भैलो (भीमल या चीड़ की लकड़ी का गट्ठर) जलाकर घुमाया जाता है और नृत्य किया जाता है।
मान्यता है कि भगवान राम के लकां विजय कर अयोध्या पहुंचने की सूचना पहाड़ में 11 दिन बाद मिली थी। इसीलिए दिवाली के 11 दिन बाद इगास (बूढ़ी दिवाली) मनाया जाता है।
भट्ट ने बताया बढ़ा फैसला
केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने कहा कि इगास (बूढ़ी दिवाली) पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा पर मैं सरकार को हृदय से बधाई देता हूं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार कि उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया। कहा कि हम लोग बूढ़ी दिवाली मनाते हैं, लेकिन नई पीढ़ी कहीं न कहीं भूलती जा रही थी। आज फिर संस्कृति से जुड़ने का हमें मौका मिला है। मैं स्वयं उत्तराखंड के किसी न किसी क्षेत्र में रहकर धूमधाम से बूढ़ी दिवाली मनाऊंगा।
छठ पूजा पर अवकाश तो इगास पर छुट्टी कोई बड़ी बात नहीं : त्रिवेंद्र
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में जब छठ पूजा की छुट्टी हो सकती है तो इगास की छुट्टी घोषित होना कोई बड़ी बात नहीं है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। मीडियाकर्मियों ने इगास पर सार्वजनिक अवकाश घोषित होने के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की भी प्रतिक्रिया मांगी। इस पर उन्होंने कहा कि जब पूजा पर अवकाश है अब इगास पर भी हो गया तो कोई बड़ी बात नहीं है।