दारमा घाटी में अभी तक कोई भी सरकारी या प्राइवेट संचार व्यवस्था नहीं है। मोबाइल नेटवर्क के लिए बीएसएनएल की ओर से दारमा व्यास लैंडस्केप में टॉवर लगाए जाने की खबर 3-4 साल से सुन रहे हैं। लेकिन ये आज तक धरातल में नजर नहीं आई। चौंदस के कुछ गांव वाले नेपाली नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं। सीमांत के गरीब लोगों के लिए सैटलाइट फोन सुविधा ज्यादा लाभदायक सिद्ध नहीं हो रही है।
बिशन सिंह बोनाल आईएफएस सेवानिवृत्त, एडीजी प्रॉजेक्ट टाइगर भारत सरकार
दारमा और व्यास घाटी में उचित विकास नहीं होना मुख्य रूप से उचित संचार व्यवस्था के साथ-साथ बिजली, स्वास्थ्य को मानता हूं। सीमांत में मोबाइल नेटवर्क होने पर हमारे घाटी के लोगों की काफी परेशानियां दूर हो जाती। दुर्गम क्षेत्र होने से कोई घटना या आपदा आने पर लोगों को अपने परिजनों और संबंधित विभाग को सूचना देने काफी परेशानी होती है। दूसरी समस्या बिजली की है।
पूरन सिंह सेलाल , सेवानिवृत्त उप महाप्रबंधक ओएनजीसी और अध्यक्ष दीलिंग दारमा सेवा समिति धारचूला
हमारा सीमांत क्षेत्र आपदा के दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र है। दशकों से इन क्षेत्रों में संचार सेवा का ना होना ये दर्शाता है कि पूर्व और वर्तमान सरकार कितनी संवेदनशील है। यहां के बाशिंदे हमारी देश की सुरक्षा की दृष्टी से हमारे सेना की आंख और कान हैं। पर आजादी के इतने सालों के बाद भी संचार व्यवस्था का ना होना और सीमांत क्षेत्र के लोगों की उपेक्षा है।
योगेश गर्ब्याल , माउंट एवरेस्ट विजेता
हमारा सीमांत चीन और नेपाल सीमा से जुड़ा होने से सामरिक दृष्टि अति महत्वपूर्ण है। चीन समय -समय पर देश की अन्य सीमा में विवाद करता रहता है। सीमांत में फिलहाल सड़क जुड़ गई है। उसी प्रकार केंद्र सरकार और राज्य सरकार को सीमांत को अति शीघ्र मोबाइल टावर की सुविधा देनी चाहिए।
जीवन ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य बलुवाकोट