लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीत सब्बी धाणी देहरादून, होणी-खाणी देहरादून, आज सात फेरों के बंधन के लिए भी अनिवार्य पसंद बन गया है। अब, रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि, जखोली और ऊखीमठ ब्लॉक के दूरस्थ गांव से लेकर चमोली, टिहरी, पौड़ी सहित अन्य जनपदों के गांवों की लड़कियां और उनके परिजन भी अपने लिए पहाड़ी वर तो ढूंढ रहे हैं। लेकिन देहरादून वाला हो..उनकी प्राथमिकता में शामिल है। देहरादून में जमीन, मकान सामाजिक स्तर बन गया है।
ऐसे में गांव, कस्बों में अच्छा रोजगार, प्रॉपर्टी के कोई मायने नहीं रह गए हैं। एक युवा ने बताया कि उनके गांव में 12 युवा हैं, जिनकी उम्र 30 से 36 वर्ष हो चुकी है, लेकिन देहरादून में जमीन, मकान नहीं होने से उनकी शादी नहीं हो पा रही है। बताया कि उनके गांव के आसपास के चार, पांच अन्य गांवों में भी 70 से अधिक युवा हैं, जो अच्छी प्राइवेट और सरकारी नौकरी कर रहे हैं। लेकिन सेहरा बंधने के इंतजार में हैं।
नौकरी लगने पर पहाड़ तो चढ़ रहीं बेटियां पर विवाह के लिए नहीं...
शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक सहित अन्य संस्थानों में सरकारी नौकरी लगने पर बेटियां दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए पहुंच रहीं हैं। लेकिन जब उनके विवाह की बात हो रही है, तो वह भी अपनी पहली प्राथमिकता देहरादून बता रही हैं। जागो हिमालयन संस्था के संस्थापक रमेश चंद्र थपलियाल बताते हैं कि चिकित्सा और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर बेटियां देहरादून सहित अन्य शहरों में जीवनयापन को प्राथमिकता दे रही हैं।
शादी के लिए देहरादून, एक स्टेटस सिंबल नहीं बल्कि कुछ लड़कियां और उनके परिजन सुविधाओं के लिहाज से पहली पसंद मान रहे हैं। कुछ के लिए यह शहरी चकाचौंध को लेकर जमीन, मकान तक सीमित है। देहरादून राजधानी बनने से वहां, काफी विकास हुआ है, जिससे कई लोग अब अपने बेटे-बेटियों के रिश्ते-नातेदारी में भी उसे शामिल कर रहे हैं। अच्छे समाज की परिकल्पना के लिए यह किसी स्तर पर उचित नहीं है। समाज का बेहतर ताना-बाना तभी बनेगा, शहर ही नहीं, गांव, कस्बे भी गुलजार हों।
- डाॅ. किरण डंगवाल, विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र, हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि, श्रीनगर गढ़वाल