राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल ने कहा कि राज्य को जड़ी-बूटी के क्षेत्र में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। यह ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम अग्रणी राज्य के रूप में उन्नति कर सकते हैं। अब आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने से औषधीय पादपों पर शोध करना आसान हो गया है।
उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को औषधीय पादपों पर शोध करने का आह्वान कर प्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को पहचानने, उनका सही इस्तेमाल करने पर जोर दिया। वह शनिवार को विज्ञान भवन, झाझरा में जर्नल ऑफ फाइटोकेमेस्ट्री एंड आयुर्वेदिक हाईट्स (उपजा) व उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यू-कोस्ट) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी में वैज्ञानिकों, शोधार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
उत्तराखंड है हर्बल राज्य
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वास्तव में हर्बल राज्य है। राज्य में औषधीय पादप बोर्ड का गठन भी किया गया है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए गोपेश्वर स्थित ‘हर्बल रिसर्च एंड डेवेलपमेंट इंस्टीट्यूट’ को सर्वोच्च एजेंसी के रूप में नामित किया गया है। लेकिन, कुछ समय से यूनिट में निदेशक नहीं होने से यह उपेक्षा का शिकार हो रहा है।
राज्यपाल ने क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र का भ्रमण कर महानिदेशक डा. राजेंद्र डोभाल, परिषद के वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने इस अवसर पर अर्द्धवार्षिक जर्नल का विमोचन भी किया। हिमालयन ड्रग्स के अध्यक्ष, जर्नल के चीफ एडीटर डा. एस फारूख ने बताया कि इस जरनल का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवा वैज्ञानिकों को शोध प्रकाशन के अवसर प्रदान करना है।