बहुत सारे वकील एसोसिएशन से जुड़े हैं पर वकालत नहीं करते।
देश में बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवं विभिन्न बार एसोसिएशन से जुड़े 21 लाख वकीलों का सत्यापन कराया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक इसमें 30 फीसदी वकील नॉन प्रैक्टिसनर्स हैं, जिन्हें बार काउंसिल एवं बार एसोसिएशन से बाहर किया जाएगा। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने ये बात कही।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि देश भर में प्रैक्टिस और नॉन प्रैक्टिस वाले वकीलों की पहचान की जा रही है। यह इसलिए भी जरूरी है कि पात्र वकीलों को बीमा, पेंशन एवं मानदेय आदि सुविधाओं का लाभ दिया जा सके।
बजट का भी प्रावधान
वकीलों को इन सुविधाओं के लिए सरकार भी बजट का प्रावधान करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि देखने में आया है कि कई लोग दुकान एवं अन्य व्यवसायों से जुड़े हैं और वकालत का पेशा नहीं करते। केवल वकालत के पेशे से जुड़े वकीलों को ही लाभ मिल सके, इसके लिए यह सब किया जा रहा है।
लंबित मुकदमों के लिए सरकार भी है जिम्मेदार
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन ने कहा कि अदालतों में जजों की और न्यायालय परिसरों में संसाधनों की कमी बनी है। ऐसे में तेजी से मुकदमे निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं।