1. पर्यावरण: राज्य के विकास मॉडल के सामने वन कानून और पर्यावरण बड़ी चुनौती है। राज्य जल विद्युत, अवस्थापना, उद्योग से जुड़े कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर्यावरणीय मानकों के कारण सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं।
2. राज्य पर बढ़ता कर्ज: सीमित संसाधनों वाले उत्तराखंड पर 65 हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है। कैग रिपोर्ट ने हाल में यह जानकारी दी। राज्य सरकार आय के नए संसाधन नहीं जुटा पा रही है। जीएसटी प्रतिपूर्ति की 2022 में मियाद खत्म हो जाने से राज्य की आर्थिक दिक्कतें बढ़ेंगी।
3. रोजगार: राज्य गठन के समय साढ़े तीन लाख पंजीकृत बेरोजगार थे। 21 साल में इनकी संख्या आठ से 10 लाख के बीच पहुंच चुकी है।
4. पलायन: पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अभाव में पलायन सबसे बड़ी चुनौती है। लोग घर-बार छोड़कर आजीविका के लिए शहरों और कस्बों में बस रहे हैं।
5. स्वास्थ्य व शिक्षा: 21 सालों में राज्य में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार तो हुआ है। लेकिन पहाड़ और मैदान के बीच खाई काफी बड़ी है। राज्य के मैदानी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ। लेकिन पहाड़ में आज भी डाक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है।