कई देशों में भी होती है भंगजीरा की खेती
भंगजीरा की खेती चीन, जापान, कोरिया, थाईलैंड समेत अन्य एशियाई देशों में की जाती है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लोग अपने इस्तेमाल के लिए भंगजीरा का उत्पादन करते हैं, लेकिन भंगजीरा के बीज का मूल्य संवर्धन करने से अब सगंध पौध केंद्र की ओर से किसानों को भंगजीरा की व्यावसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा, जिससे किसानों को आमदनी बढ़ सके।
मांसपेशियों को मजबूत बनाता है ओमेगा
भंगजीरा बीज के तेल में फैटी ऑयल ओमेगा की मात्रा अधिक है, जो शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। इसे साथ ही रक्त के थक्के रोकने, पाचन, कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, नवजात शिशु के दिमाग का विकास, त्वचा, बालों की पोषकता का विकास, एलर्जी को कम करने व अल्जाइमर में लाभदायक है।
राज्य में पाई जाने वाली वनस्पति संपदा को किस तरह से मॉडर्न रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस पर सगंध पौध केंद्र शोध कर रहा है। इसका परिणाम है कि भंगजीरा की नई प्रजाति तैयार कर तेल से ओमेगा कैप्सूल बन रहे हैं, जो पूरी तरह से शाकाहारी हैं। अभी तक भारत में मछली के तेल और कॉड लीवर ऑयल से ओमेगा कैप्सूल तैयार किए जा रहे हैं। इसका इस्तेमाल शाकाहारी लोग नहीं करते हैं।
-नृपेंद्र सिंह चौहान, निदेशक सगंध पौध केंद्र