विधेयक में ये है व्यवस्था
- राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही सभी पात्र आश्रितों को आरक्षण का लाभ मिलेगा।
- 2004 से क्षैतिज आरक्षण के माध्यम से सरकारी सेवा में शामिल हो चुके आंदोलनकारियों की सेवाओं को मिलेगी वैधता।
- चिह्नित आंदोलनकारियों की पत्नी या पति, पुत्र एवं पुत्री के साथ ही विवाहिता, विधवा, पति द्वारा परित्यक्त, तलाकशुदा पुत्री को इसमें शामिल किया गया है।
- विधेयक को मंजूरी मिलने से 11,420 आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को मिलेगा लाभ।
कब क्या हुआ
- 2004 में एनडी तिवारी की सरकार में राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का शासनादेश हुआ।
- इस शासनादेश के आधार पर करीब 1,700 आंदोलनकारी सरकारी नौकरी में लगे।
- वर्ष 2016 में हरीश रावत सरकार में आरक्षण को कानूनी रूप देने के लिए मंत्रिमंडल ने विधेयक पास कर राजभवन भेजा।
- वर्ष 2021 में सीएम धामी ने अपने पहले कार्यकाल में कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर राजभवन को आरक्षण के मसले से अवगत कराया।
- वर्ष 2022 में राजभवन से विधेयक कुछ आपत्ति के साथ वापस भेजा गया।
- सितंबर 2023 में पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने विधेयक को सदन में पेश किया।
- छह फरवरी 2024 को विधेयक कुछ संशोधनों के साथ फिर से राजभवन भेजा गया।
13 साल से राज्य आंदोलनकारी और उनके आश्रित नौकरी में आरक्षण के इस लाभ से वंचित थे। इसका लाभ गोलीकांड में घायल आंदोलनकारियों, जेल गए आंदोलनकारियों, लाठीचार्ज में घायल सक्रिय आंदोलनकारियों समेत सभी आंदोलनकारियों को मिलेगा।
-रविंद्र जुगरान, पूर्व अध्यक्ष, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद