विभिन्न चुनावों में उनका मुकाबला श्रीचंद, सुरेश राम, लाखन सिंह से होता रहा। लाखन और सुरेश से वे पराजित भी हुए और जीते भी। उत्तराखंड बनने के बाद से वे हर चुनाव में अविजित ही रहे। इस राज्य में वह एक बड़े नेता के रूप में उभरे और 2012 में मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदार बने। तब उनके मुख्यमंत्री बनने की बहुत संभावना थी लेकिन अंतिम समय में विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बना दिया गया।
वर्ष 2002 और 2007 में वे आरक्षित सीट मुक्तेश्वर और 2012 में वे बाजपुर से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। 2017 में चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल होने के बाद वे बाजपुर से दोबारा विधायक चुने गए। कुल पांच बार विधायक रहे आर्य उत्तराखंड में एक बड़े दलित नेता के रूप में स्थापित हैं। वर्ष 2007 से 2014 तक यशपाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे।
विधानसभा अध्यक्ष सहित तमाम अहम विभागों के रहे मंत्री
यशपाल आर्य को उत्तराखंड में तमाम महत्वपूर्ण दायित्व मिले हैं। वर्ष 2002 में राज्य की प्रथम निर्वाचित सरकार के दौर में एनडी तिवारी ने अपने चहेते यशपाल को विधानसभा अध्यक्ष बनवाया। 2012 में कांग्रेस के पुन: सत्ता में आने पर विजय बहुगुणा सरकार में उन्हें सिंचाई, राजस्व और तकनीकी शिक्षा विभाग मिले। 2017 में भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा सरकार में वे परिवहन, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और आबकारी विभागों के मंत्री रहे।