बताया जाता है कि इसकी जानकारी भी केवल कसम लेने और दिलाने वाले को ही होती है। इसके अलावा किसी को नहीं। चुनाव में कितने लोगों को नमक-लोटा की कसम दिलवाई गई है, इसका विवरण भी अलग से रखा जाता है।
क्षेत्र से संबंध रखने वाले युवा नेता दीपक सिंह का कहना है कि कसम दिलाकर मतदाता को बंधन में नहीं बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कसम को राजनीति से अलग रखने की भी बात कही। कहा कि अब युवा पीढ़ी धीरे-धीरे जागरूक हो रही है और कसम की जगह प्रत्याशी की योग्यता देखकर वोट करती है।
क्या होती है नमक-लोटा कसम
नमक-लोटा की कसम लोटे (बर्तन) में नमक डालकर दिलाई जाती है, जिसमें कसम लेने वाला व्यक्ति ईष्ट देव को साक्षी मानकर पानी से भरे लोटे में नमक डालता है और कसम दिलाने वाले के प्रत्याशी को वोट नहीं देने पर पानी में नमक की तरह गलने की बात कहता है।
ये वोटर की इच्छा है कि वह किसे अपना वोट देना चाहता है। कोई शिकायत करता है कि उसे वोट के लिए डराया या धमकाया जा रहा है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
-मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी