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उत्तराखंड विस सत्र: कृषि कानूनों और किसानों की समस्या पर सदन में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट

Fri, 27 Aug 2021 09:24 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि विपक्ष कृषि कानूनों पर केवल किसानों को भटकाने और भड़काने का काम कर रहा है।
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विपक्ष का सदन से वॉकआउट - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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देश के तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुक्रवार को विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सत्ता पक्ष ने जब जवाब देना शुरू किया तो वह विरोध में उतर आए और सदन से वॉकआउट कर दिया। उधर, सत्ता पक्ष का कहना है कि उनकी सरकार किसानों कि हित में काम कर रही है। 2022 तक उनकी आय दोगुनी करने पर तेजी से काम किया जा रहा है।

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शुक्रवार को विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि विपक्ष कृषि कानूनों पर केवल किसानों को भटकाने और भड़काने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सरकार ने केवल पांच वस्तुओं को छूट प्रदान की थी। इसमें से आलू और प्याज को लेकर बाद में संशोधन कर दिया गया था, जिसके तहत होल सेल विक्रेता को 250 कुंतल और रिटेलर को 50 कुंतल तक भंडारण की सीमा तय की गई है। 

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उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग कंपलसरी नहीं है। किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल उन वस्तुओं को एमएसपी के आधार पर खरीदती है, जो राशन कार्ड के माध्यम से जनता तक पहुंचाया जाता है। 15,700 फार्मर मशीन बैंक स्थापित करेंगे। समय पर खाद, बेहतर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सरकार ने काम किया है। किसानों को पांच लाख, तीन लाख और केंद्र से छह हजार रुपये किसान सम्मान निधि देने का काम सरकार ने किया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, देश का पहला ऐसा राज्य है, जो ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर एक्ट लाया। इसके तहत जो भी विकासखंड चुने जाते हैं, वहां रासायनिक खाद इत्यादि ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंधित है। कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हम देश के पहले ऐसे राज्य हैं जो 6400 क्लस्टर पर कर रहे हैं। 1300 से ज्यादा आउटलेट बनाने जा रहे हैं, जिसमें से पहले चरण में 600 से ज्यादा आउटलेट बनाने जा रहे हैं। हम सीधे किसानों को आउटलेट वितरित करेंगे। सरकार ने मंडुआ, चौलाई को खरीदने के लिए मंडी के माध्यम से खरीद की प्रक्रिया अपनाई। सारी कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से इनकी खरीद की है।

हॉर्टिकल्चर उत्पादों को बाजार देने का काम किया

हॉर्टिकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के माध्यम से भी हॉर्टिकल्चर उत्पादों को बाजार देने का काम किया है। जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए 300 करोड़ का फेंसिंग का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। जिन किसानों की आय दस लाख से अधिक होगी, उन्हें कृषि क्षेत्र में किसी भी तरह की सब्सिडी का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसे जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक 99 प्रतिशत गन्ना भुगतान किया जा चुका है। जिन किसानों को भुगतान नहीं हुआ है, उनकी आरसी नहीं काटी जाएगी।

इसके लिए निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि कानून केंद्र के हैं और वर्तमान में मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, लिहाजा इन पर चर्चा की आवश्यकता नहीं थी। उधर, उन्होंने कहा कि कृषि कानून तो अभी आए हैं लेकिन प्रदेश में मॉडल कृषि एक्ट (एपीएलएम एक्ट) पूर्व में ही पास हो चुका है। तब विपक्ष ने कोई विरोध नहीं जताया था। इस पर विपक्ष के नेता विरोध में उतर आए। उन्होंने कहा कि तब भी विरोध जताया गया था। मामला बढ़ा विरोध करते-करते वह वेल में आ गए। बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया। 

इससे पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि केंद्र ने तीन काले कानून थोपे हैं। किसान आंदोलन कर रहे हैं। 600 किसान शहीद हो चुुके हैं लेकिन सरकार उनकी सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान इस कानून में एमएसपी को शामिल करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार सुनने को तैयार नहीं है। क्योंकि सरकार इन कानूनों के माध्यम से धीरे-धीरे सरकारी मंडियों को बंद करने की मंशा रखती है। बाद में प्राइवेट मंडियों का बोलबाला और मनमानी हो जाएगी, जिससे किसानों का शोषण होना तय है। उनके साथ उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा, विधायक मनोज रावत, काजी निजामुद्दीन, ममता राकेश, हाजी फुरकान आदि ने भी कृषि कानूनों पर विरोध जताया। 

गन्ना किसानों के भुगतान पर सत्ता पक्ष के विधायक ने भी हां में हां मिलाई
जब सदन में विपक्ष गन्ना किसानों को भुगतान न होने विशेषकर काशीपुर शुगर मिल के किसानों को भुगतान का मुद्दा उठा रहा था तो सत्ता पक्ष के विधायक हरभजन सिंह चीमा भी समर्थन में नजर आए। इससे सरकार असहज हुई।
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गन्ना मूल्य तय करने के लिए समिति का गठन 

मानसून सत्र के पांचवें दिन सदन में विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी गन्ना मूल्य और बकाया राशि भुगतान का मुद्दा उठाया। जवाब में चीनी एवं गन्ना विकास मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने सदन को अवगत कराया कि आगामी पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ने का मूल्य तय करने के लिए समिति का गठन किया गया है। समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार निर्णय लेगी। 

प्रश्न काल में मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने गन्ना किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चार सालों में राज्य सरकार ने गन्ने का मूल्य एक रुपये भी नहीं बढ़ाया है। केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में गन्ने का मूल्य 230 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था। आगामी सत्र के लिए 290 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारित किया गया। केंद्र ने चार सालों में मात्र 60 रुपये बढ़ाए हैं। जबकि महंगाई कई गुना बढ़ी है। प्रदेेश सरकार ने चार सालों में एक रुपये भी नहीं बढ़ाया है।

जवाब में गन्ना एवं चीनी विकास मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि सरकारी चीनी मिलों में किसानों को गन्ने का शत प्रतिशत भुगतान किया गया है। आगामी पेेेराई सत्र से सितारगंज चीनी मिल को शुरू किया जाएगा। गन्ने का मूल्य तय करने के लिए समिति बनाई गई है। समिति की सिफारिशों पर सरकार फैसला लेगी। 

चीनी मिलों पर 231 करोड़ का गन्ना बकाया 
झबेरड़ा से भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल के प्रश्न के जवाब में विभागीय मंत्री यतीश्वरानंद ने कहा कि इकबालपुर, लिबरहेड़ी, लक्सर चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के 231 करोड़ बकाया हैं। जिसमें इकबालपुर चीनी मिल पर 179.30 करोड़ और लिबरेहड़ी पर 18.83 करोड़ और लक्सर मिल पर 33.32 करोड़ बकाया हैं। हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर होने से बकाया भुगतान को लेकर चीनी मिलों पर कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। हाईकोर्ट के आदेश आने पर सरकार की ओर से तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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