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यूपीसीएल के कर्मियों ने उत्पीड़न के खिलाफ अनुसूचित जाति आयोग में लगाई गुहार

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यूपीसीएल की कार्यप्रणाली एक बार फिर से सवालों के घेरे में हैं। विभाग के कर्मचारियों ने ही विभाग के निदेशक मानव संसाधन पर पदोन्नति और साक्षात्कार में अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। इस संबंध में कर्मचारियों ने अनुसूचित जनजाति आयोग से गुहार लगाते हुए उन्हें न्याय प्रदान कर दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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उत्तरखंड पावर कारपोरेशन (यूपीसीएल) गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से सहायक अभियंता (विद्युत एंव यांत्रिक) प्रशिक्षु, सहायक अभियंता प्रशिक्षु, सीनियर इंडस्ट्रीयल इंजीनियर, लेखाधिकारी, विधि अधिकारी, कार्मिक अधिकारी के सीधी एवं विभागीय पदों में 29 अगस्त को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद 29 नवंबर से छह दिसंबर को साक्षात्कार परीक्षा आयोजित की गई। नियमानुसार साक्षात्कार के लिए गठित कमेटी में चार सदस्य प्रबंध निदेशक, निदेशक मानव संसाधन, निदेशक परिचालन अथवा परियोजना व एक वाह्य विषय विशेषज्ञ होता है। आरोप है कि जो कमेटी गठित की गई। उसमें ओएनजीसी के सेवानिवृत्ति अधिकारी अनुसूचित जाति के सदस्य के रूप में साक्षात्कार कमेटी में रखा गया। जो विभागीय नियमों के खिलाफ है। इस संबंध में एक अभ्यर्थी अंकिता बिजल्वाण ने अनुसूचित जनजाति आयोग गुहार लगाकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं कार्यालय अधीक्षक विद्युत वितरण मंडल ग्रामीण गंगा सिंह ग्वाल ने भी अनुसूचित जनजाति आयोग में गुहार लगाकर विभाग के निदेशक मानव संसाधन पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि निदेशक मानव संसाधन की ओर से जानबूझ कर उन्हें नियम विरुद्ध पदोन्नति से वंचित रखा गया। उनके स्थान पर उनसे जूनियर को कार्यालय अधीक्षक विशेष श्रेेणी के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। जबकि जिस व्यक्ति को नियय विरुद्ध पदोन्नति दी गई उस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे और हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्होंने ने भी आयोग से उक्त प्रकरण का संज्ञान लेकर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
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