रोडवेज की जिन परिसंपत्तियों को कर्मचारी यूनियन ने आकलन के बाद 800 करोड़ का माना है, उनके लिए 205 करोड़ पर सहमति होने से यूनियन सहमत नहीं है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने कहा है कि जब तक बाजार मूल्य पर बात नहीं होगी, तब तक वह इस बंटवारे को स्वीकार नहीं करेंगे।
दरअसल, उत्तर प्रदेश से परिवहन निगम की परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट नैनीताल ने केंद्रीय परिवहन सचिव को तलब किया था। दोनों की बैठक कराई गई थी। हाईकोर्ट ने यूपी को आदेश दिए थे कि वह बंटवारे के तहत 28 करोड़ रुपये की किश्त के हिसाब से भुगतान करें। इसके खिलाफ यूपी परिवहन निगम के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। अब इस मामले में उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है।
याचिका दायर करने वाली उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि बंटवारे के नियमों के हिसाब से परिसंपत्तियों के बाजार मूल्य का 13.66 प्रतिशत हिस्सा उत्तराखंड को मिलना था। जब उन्होंने याचिका दायर की थी तो उस वक्त इन परिसंपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 50 हजार करोड़ रुपये था। इस हिसाब से उन्होंने न्यायालय में उत्तराखंड के हिस्से के 800 करोड़ देने की मांग रखी थी।
अशोक चौधरी के मुताबिक, उत्तराखंड सरकार ने जिन 205 करोड़ पर सहमति दी है, उससे ज्यादा तो 250 करोड़ रुपये केवल हमारी परिसंपत्तियों का सर्किल रेट के हिसाब से मूल्य है। उन्होंने इस फैसले को गलत करार दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश, बाजार मूल्य के हिसाब से बंटवारा नहीं करेगा, तब तक वह इस समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे। उनकी यूनियन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ती रहेगी।