यदि कोई छात्र हिंदी में पास नहीं होता और अन्य विषय में उत्तीर्ण हो जाता है तो उसे फेल ही घोषित किया जाता है।
हिंदी विषय को छात्र कम आंककर चलते हैं। इसलिए उनके नंबर भी कम आते हैं, जबकि मेरिट हिंदी विषय से ही बनती है। साइंस के बच्चों को समय कम मिलता है, इसलिए वे हिंदी की ओर कम ध्यान देते है।
-संतोष तिवारी, हिंदी, प्रवक्ता राइका ढिकुली
गली-कूचों में अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय खुल गए है, जहां हिंदी बोलने पर बच्चों को दंड दिया जाता है। जहां सारा ध्यान अंग्रेजी व विज्ञान के विषयों पर केंद्रित होता है। मातृ भाषा व मातृ बोली बोलने पर दंड प्रावधान है। ऐसे में हिंदी विषय का विकास बाधित हो रहा है और छात्रों की रुचि कम हो रही है। त्रिभाषी फॉर्मूला लागू होता तो आज हिंदी की स्थिति दयनीय नहीं होती। राज्य भाषा हिंदी तथा भाषाओं को सीखने की स्थिति में छात्र रहता।
- डा. गिरीश चंद पंत, एसोसिएट प्रोफेसर हिंदी, पीएनजीपीजी कालेज रामनगर