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समय पर नहीं भेजे जा रहे सैंपल, जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने में हो रही देरी

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देहरादून। जिलों से कोरोना संक्रमितों के सैंपल समय पर न भेजे जाने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इससे तेजी से फैलने वाले कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन संक्रमण का पता भी समय पर नहीं लग पा रहा है।
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उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए पहले सैंपल दिल्ली, चंडीगढ़ आदि बड़े शहरों में स्थित वायरोलॉजी लैब भेजे जाते थे। जिससे कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट का पता चल पाता था। करीब एक महीने पूर्व राजकीय दून मेडिकल कॉलेज पटेलनगर की वायरोलॉजी लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा शुरू कर दी गई। उत्तराखंड में अभी सिर्फ राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की लैब में ही जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा है। ऐसे में सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को कोरोना सैंपल यहां भेजने के निर्देश दिए गए थे। कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल कम आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी सैंपल में कोरोना वैरिएंट जांचने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग की पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह दिन तक लग जाते हैं। दूसरा लैब में जिस मशीन से इसकी जांच की जाती है, उसमें एक बार में अधिकतम 20, 80 और 120 के सांचे होते हैं। 20, 80 और 120 सैंपल आने पर ही उनकी जांच किए जाने की फिलहाल व्यवस्था है। दरअसल, अगर एक बार में इससे कम सैंपल जांचने में इस पर खर्चा अधिक आता है। ऐसे में सैंपल कम आने के कारण जीनोम सिक्वेंसिंग की जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। इनमें से कुछ ऐसे कोरोना संक्रमितों के सैंपल भी हैं, जो विदेश से आए हैं या फिर ओमिक्रॉन संक्रमितों के संपर्क में आए हैं। इन स्थितियों में रिपोर्ट देरी से आने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ने की संभावना ज्यादा है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं कि कोरोना संक्रमितों के सैंपल समय पर यहां भेजें। ताकि जीनोम सिक्वेंसिंग की प्रक्रिया भी समय पर पूरी की जा सके।
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