अक्सर मंच पर चमकने वाले राजनीति सितारे उत्तराखंड के सितारगंज में मोहन भागवत के आगे जमीं पर दिखे। 11 फीट ऊंचे मंच पर मंचासीन आरएसएस के अगुवा मोहन राव भागवत को सुनने के लिए राजनीतिक धुरंधर भी जमीं पर बैठे रहे।
न चेहरा दिखाने की होड़ थी और न ही किसी तरह का शोर गुल हुआ। बस, हर कोई एक ही नारे ‘वंदेमातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के साथ आरएसएस के मुखिया का स्वागत करते दिखा।
सिडकुल के बारह राणा स्मारक स्थल पर सुबह निर्धारित 10:45 बजे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक पहुंचे। इसके बाद करीब 12:45 बजे वह छात्रावास के विश्राम गृह से स्मारक में नवस्थापित महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण करने निकले तो भाजपा के प्रदेश स्तरीय वरिष्ठ नेता और विधायकगण कतारबद्ध उनके स्वागत में खड़े नजर आए।
वहीं, थारु जनजाति की दहला पिपलिया गांव की टीम प्राचीन लोक नृत्य की छटा बिखेरती चल रही थी। मूर्ति स्थल पर मुख्य अतिथि मोहन राव भागवत और विशिष्ट अतिथियों के अलावा उनकी सुरक्षा में लगे आयोजन समिति के लोग ही मौजूद रहे।
चेहरा दिखाने और फोटो खिंचवाने की होड़ कहीं नहीं
अनावरण के बाद भागवत का काफिला छात्रावास के कक्षों का लोकार्पण कर सीधे मंच के लिए रवाना हो गया। जिप्सी में सवार भागवत और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी, पूर्व डीजीपी ज्योतिस्वरूप पांडे, बारह राणा स्मारक समिति के अध्यक्ष श्रीपाल राणा जनता और कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए हिन्दू महासम्मेलन के मंच तक पहुंचे।
यहां कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर उनका स्वागत किया। लेकिन, पूरे कार्यक्रम में चेहरा दिखाने और फोटो खिंचवाने की होड़ कहीं नहीं थी। सब कुछ व्यवस्थित रहा।
महासम्मेलन का शुभारंभ भारत माता और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों के अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता राजू भंडारी, मोहिनी पोखरिया ही मंच पर रहे और बाकी आरएसएस, भाजपा व अन्य हिन्दू संगठनों के वरिष्ठ नेता उन्हें सुनने के लिए सभास्थल में जमीन पर बैठ गए और उन्होंने घंटों तक खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में उन्हें सुना।
खुली जीप में मंच तक लाए गए भागवत
सर संघ चालक मोहन भागवत को प्रतिमा अनावरण स्थल से मंच तक खुली जीप में लाया गया, जहां पर समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इस दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्रीय मंत्री डालचंद, विधायक राजेश शुक्ला, राजू भंडारी, डा. हरीश, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, प्रकाश पंत, सुरेश परिहार, विजय फुटेला, शिव अरोरा, भारत भूषण चुघ आदि मौजूद थे।
गायब थी भागवत की तल्खी
तेज-तर्रार वक्ता के तौर पर पहचाने जाने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहनराव भागवत की तल्खी शनिवार को गायब थी। लोग जिस उम्मीद को लेकर उन्हें सुनने पहुंचे थे, उन्हें वैसा कुछ नहीं मिला।
हफ्ते भर पहले भागवत के एक विवादास्पद बयान ने पूरे देश में बहस का मुद्दा छेड़ दिया था। उन्होंने बयान दिया था कि मदर टेरेसा गरीब हिंदुओं को ईसाई बनाने का काम करती थीं।
इसी तरह भागवत के कई और बयान भी देश में बहस का विषय बने। लेकिन शनिवार को भागवत ने अपने पौन घंटे के संबोधन को महाराणा प्रताप की जीवनचर्या के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रखा।
जनजाति बच्चों के छात्रावास के नवनिर्मित कक्षों का भी किया लोकार्पण
सर संघ चालक ने छात्रावास के नवनिर्मित कक्षों का भी लोकार्पण किया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन राव भागवत बारह राणा स्मारक के छात्रावास में रह रहे 60 बच्चों से मिले।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलकर देश व संस्कृति को बचाएं। महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर अपने धर्म व संस्कृति की रक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम आयोजन समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक भी ली।
शनिवार को बारह राणा स्मारक में महाराणा प्रताप की मूर्ति अनावरण समारोह और हिंदू महासम्मेलन के समापन के बाद आरएसएस के सरसंघ चालक शाम 4:30 बजे छात्रावास में जनजाति के बच्चों से मिले और उनके रहन-सहन व शिक्षा-दीक्षा की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के वीरता व साहसिक कार्यों से सभी को प्रेरणा मिलती है।
बच्चे अपनी संस्कृति की धरोहर को बचाने के लिए उनके आदर्शों पर चलें। आधा घंटा बच्चों के बीच रहने के बाद भागवत ने महाराणा प्रताप प्रतिमा अनावरण समारोह समिति के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।
इसके बाद शाम 7:30 बजे काठगोदाम रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हो गए। इस मौके पर कुंवर शिववर्धन सिंह, कमल जिंदल, नवतेज पाल सिंह, मृदुल त्रिपाठी, दिनेश राणा, राजू हरियाणवी, वर्षा बहन, नरेश कंसल, डा. एसएस टुरना, महेश मित्तल आदि थे।
संकल्प लें, नहीं छोड़ेंगे अपना धर्म
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहनराव भागवत ने कहा कि सभी एकजुट होकर अपने देश, अपनी संस्कृति और अपने स्वाभिमान की रक्षा करें।
हमें विदेशों की नहीं बल्कि अपने महापुरुषों की नकल करनी होगी, तभी हमारे भीतर स्वाभिमान कायम रहेगा। भागवत उत्तराखंड के सितारगंज स्थित राणा स्मारक में शनिवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की धातु निर्मित विशाल मूर्ति का अनावरण करने के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से राजा मान सिंह ने अपनी प्रजा की खातिर मुगल शासक अकबर की शर्त मान ली थी, उसी तरह से महाराणा प्रताप भी कर सकते थे, पर उन्होंने नहीं किया, क्योंकि उन्हें पराधीनता स्वीकार नहीं थी।
उन्होंने अकबर से युद्ध किया तो अकबर ने महाराणा प्रताप की सेना में शामिल एक मुस्लिम को अपने धर्म का वास्ता देते हुए मुगल सेना का साथ देने की बात कही, मगर उस मुस्लिम सैनिक ने इंकार कर दिया और बोला, राज्य की रक्षा पहला धर्म है। भागवत ने कहा कि इसलिए मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र धर्म होना चाहिए।
सरसंघचालक ने कहा कि हम अपने देश को विदेशों से भी कहीं अच्छा बनाएंगे। हम अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे, अगर किसी दूसरे के धर्म में अच्छी बातें हैं तो उसे हम अपने धर्म में शामिल करेंगे।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की मूर्ति के दर्शन कर उनके जीवन का स्मरण करें और देश, धर्म, संस्कृति और समाज के बारे में अपनी निष्ठा रखते हुए बज्र संकल्प लेकर आगे चलें जिससे एक दिन अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में भी महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित होगी और हमारा धर्म दुनिया का सिरमौर बनेगा।
उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक ज्योति स्वरूप पांडेय ने कहा कि खटीमा और उसके आसपास क्षेत्रों में बसे बारह राणा समुदाय के लोगों ने कभी पराधीनता स्वीकार नहीं की।
लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी ने कहा कि महाराणा प्रताप अदम्य साहस और वीरता के प्रतीक हैं। उन्होंने मुगल शासक अकबर की शर्तों को ठुकरा कर घास की रोटी खाना पसंद किया।