वहीं, चर्च को संचालित कर रहीं साधना लांस का कहना है कि घटना से पहले वाली रात चर्च के आसपास काफी शोरगुल था। कई लोग गाड़ियों में दूर-दर बैठे थे और अगले दिन सुबह ही अचानक इसी तरह का शोरगुल बढ़ा और तोड़फोड़ शुरू हो गई। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस और खुुफिया विभाग को भनक क्यों नहीं लगी जबकि घटना के समय ही कुछ किमी दूर कुंजा बहादरपुर में मुख्यमंत्री का भी कार्यक्रम था।
रविवार सुबह दस बजे सौ से अधिक हमलावर चर्च में मारपीट और तोड़फोड़ कर दस मिनट में ही फरार हो गए। चर्च संचालिका साधना लांस के अनुसार, उनके पड़ोस में एक व्यक्ति के यहां शनिवार रात को काफी शोरगुल था। कई गाड़ियां खड़ी थीं, जिनमें लोग बैठे थे। काफी देर बाद गाड़ियां रवाना हुईं। रविवार सुबह प्रार्थना के समय चर्च में दस-बारह लोग थे, जिन पर अचानक भीड़ ने हमला कर दिया। ऐसे में यह अपने आप में बड़ा सवाल है कि गाड़ियों में बैठे लोग कौन थे और क्या योजना बना रहे थे। इससे भी बड़ा सवाल है कि यदि यह साजिश थी तो खुफिया विभाग और पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। वह भी तब, जब रविवार सुबह 10.30 बजे कुंजा बहादरपुर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी एक कार्यक्रम में शामिल होना था। पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो पुलिस और खुफिया विभाग की सक्रियता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
आखिर तोड़फोड़ करने वाले लोगों की संख्या कितनी रही होगी, इसे लेकर भी पुलिस जांच कर रही है। तहरीर में बताया गया है कि करीब ढाई सौ लोग थे जबकि खुफिया विभाग के सूत्रों के अनुसार, घटना में 80 से 90 लोग शामिल थे। एक सवाल यह भी है कि हमलावर में ज्यादातर मोहल्ले के लोग शामिल थे या बाहरी। साधना लांस के अनुसार, मोहल्ले के बहुत कम लोग थे। अधिकांश चेहरे शहर की दूसरी कॉलोनी के थे। हालांकि, पुलिस की जांच के बाद ही सही तस्वीर सामने आ पाएगी।
सोशल मीडिया और मोबाइल लोकेशन भी बनेगी मददगार
धर्मांतरण की घटना को लेकर बताया जा रहा है कि कुछ लोगों की ओर से फोन कर अन्य लोगों को घटनास्थल पर बुलाया गया, जिससे यहां काफी संख्या में लोग एकत्र हो गए। ऐसे में यह कौन लोग थे। पुलिस इसके लिए सोशल मीडिया और घटनास्थल पर फोन ट्रेसिंग के जरिये जांच करेगी। एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि घटना की सभी पहलुओं पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।