ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों की हड़ताल के बीच चौंकाने वाली बात सामने आई है। मंत्री से ऊर्जा कर्मचारियों की दो स्तर की वार्ता हो चुकी। वार्ता में समझौता भी हुआ लेकिन निगमों ने अब तक शासन को यह नहीं बताया कि इन मांगों को पूरा करने पर कितना खर्च होगा।
रविवार को सोशल मीडिया में सचिव ऊर्जा सौजन्या का एक पत्र खूब वायरल हुआ। यह पत्र सचिव ऊर्जा की ओर से तीनों निगमों के एमडी को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि ऊर्जा मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के साथ ऊर्जा कर्मचारियों की 14 सूत्री मांगों को लेकर दो बार वार्ता हुई है। 27 जुलाई के बाद 30 सितंबर को भी वार्ता हुई। कर्मचारी संगठनों के पत्रों को शासन के पत्रों के माध्यम से निगमों को भेजा जाता रहा है। लेकिन दोनों बैठकों में कर्मचारी संघों की ओर से उठाई गई मांगों और प्रकरण पर लिए गए निर्णय की वर्तमान स्थित और मांगों के निपटारे में होने वाले खर्च का ब्योरा व मांगों के औचित्य से अभी तक शासन को अवगत ही नहीं कराया गया है। उन्होंने तीनों निगमों के एमडी को पत्र भेजकर रविवार को ही दोपहर तीन बजे तक पूरा ब्योरा तलब किया।
इन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं कर्मचारी
- एसीपी की पुरानी व्यवस्था लागू हो
- कर्मचारियों की वेतन विसंगति को दूर की जाए
- तीनों निगमों में फ्रीज की गई भर्तियों को खोला जाए
- आईटीआई पास को नियुक्ति पर 2600 ग्रेड पे दिया जाए
- पॉलिटेक्निक पास कार्मिकों के घटाए गए वेतन को बढ़ाया जाए
- उपनल संविदा स्वयं सहायता समूह व ठेकेदारी प्रथा बंद हो
- उपनल संविदा व अन्य कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- सभी नियुक्त कर्मियों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए
- अवर अभियंताओं का वेतन 4800 किया जाए