फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों पर सख्ती, यूजेवीएनएल ने 189 अधिकारी कर्मियों को एस्मा के तहत जारी किया नोटिस

Sun, 03 Oct 2021 11:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

यूजेवीएनएल की ओर से जारी नोटिस के मुताबकि अगर कर्मचारियों ने आंदोलन या हड़ताल की तो एस्मा के साथ ही आचरण नियमावली 1956 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तीनों ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों की हड़ताल में अब कुछ ही घंटे बचे हैं। हड़ताल टालने को लेकर प्रदेश में पहले ही आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर चुकी सरकार अब सख्ती के मूड में है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) प्रबंधन ने अपने 189 अधिकारी-कर्मचारियों को एस्मा के तहत नोटिस जारी किया है।

विज्ञापन


यूजेवीएनएल की ओर से जारी नोटिस के मुताबकि अगर कर्मचारियों ने आंदोलन या हड़ताल की तो एस्मा के साथ ही आचरण नियमावली 1956 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सभी कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संयुक्त मोर्चा की ओर से की गई हड़ताल की घोषणा अवैध है। इसलिए अगर किसी भी कर्मचारी ने हड़ताल में हिस्सा लिया या किसी को उकसाने की कोशिश की तो एस्मा के तहत गिरफ्तारी, सजा और आर्थिक दंड की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

उपनल, पीआरडी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों की तत्काल सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। हड़ताल या आंदोलन की अवधि में सभी नियंत्रक अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वह रोजाना अपने कर्मचारियों की उपस्थिति लेना सुनिश्चित करें। ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले और हड़ताल में शामिल होने वाले कर्मचारियों की सूची छह अक्तूबर को दोपहर 12 बजे तक यूजेवीएनएल एमडी कार्यालय को उपलब्ध कराएं। सभी कर्मचारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वह बिना पूर्व अनुमति अपना दफ्तर नहीं छोड़ेंगे। प्रदेश में सुचारू बिजली उत्पादन के लिए सभी इंतजामात किए जाएंगे। आपको बता दें कि सचिव ऊर्जा सौजन्या की ओर से 27 जुलाई को हड़ताल के दौरान छह माह के लिए एस्मा लागू करने के आदेश जारी किए गए थे, जो कि अभी प्रभावी हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

दो बार मंत्री ने वार्ता की लेकिन निगमों ने शासन को अंधेरे में रखा

ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों की हड़ताल के बीच चौंकाने वाली बात सामने आई है। मंत्री से ऊर्जा कर्मचारियों की दो स्तर की वार्ता हो चुकी। वार्ता में समझौता भी हुआ लेकिन निगमों ने अब तक शासन को यह नहीं बताया कि इन मांगों को पूरा करने पर कितना खर्च होगा। 

रविवार को सोशल मीडिया में सचिव ऊर्जा सौजन्या का एक पत्र खूब वायरल हुआ। यह पत्र सचिव ऊर्जा की ओर से तीनों निगमों के एमडी को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि ऊर्जा मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के साथ ऊर्जा कर्मचारियों की 14 सूत्री मांगों को लेकर दो बार वार्ता हुई है। 27 जुलाई के बाद 30 सितंबर को भी वार्ता हुई। कर्मचारी संगठनों के पत्रों को शासन के पत्रों के माध्यम से निगमों को भेजा जाता रहा है। लेकिन दोनों बैठकों में कर्मचारी संघों की ओर से उठाई गई मांगों और प्रकरण पर लिए गए निर्णय की वर्तमान स्थित और मांगों के निपटारे में होने वाले खर्च का ब्योरा व मांगों के औचित्य से अभी तक शासन को अवगत ही नहीं कराया गया है। उन्होंने तीनों निगमों के एमडी को पत्र भेजकर रविवार को ही दोपहर तीन बजे तक पूरा ब्योरा तलब किया।

इन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं कर्मचारी
- एसीपी की पुरानी व्यवस्था लागू हो
- कर्मचारियों की वेतन विसंगति को दूर की जाए
- तीनों निगमों में फ्रीज की गई भर्तियों को खोला जाए
- आईटीआई पास को नियुक्ति पर 2600 ग्रेड पे दिया जाए
- पॉलिटेक्निक पास कार्मिकों के घटाए गए वेतन को बढ़ाया जाए
- उपनल संविदा स्वयं सहायता समूह व ठेकेदारी प्रथा बंद हो
 - उपनल संविदा व अन्य कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- सभी नियुक्त कर्मियों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए
- अवर अभियंताओं का वेतन 4800 किया जाए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें