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हरिद्वारः गंगा का जलस्तर हुआ खतरे के निशान से नीचे

Sun, 17 Aug 2014 12:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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लगातार तीन दिन बढ़ रहे गंगा नदी के जलस्तर में रविवार को कुछ कमी दर्ज की गई। गंगा का जलस्तर 292.90 मीटर पर पहुंचा है। खतरे का निशान 294 मीटर पर है।
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शनिवार को हरिद्वार में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचते ही जिले के 14 गांवों में बाढ़ आ गई थी। गंगा का पानी भरने से मकान गिरने लगे थे।

लोगों के खाने-पीने का सामान नष्ट हो गया। जिले में करीब 60 हजार बीघा फसल को नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार सुबह गंगा का जलस्तर खतरे के निशान (294 मीटर) को पार गया गया। करीब आठ बजे लक्सर क्षेत्र के कलसिया और डुमनपुरी गांव में पानी भर गया। शनिवार सुबह करीब पांच बजे शेरपुर बेला में गंगा का तटबंध टूट गया।

इससे शेरपुर बेला, जोगावाला, दाबकी खेड़ा, बालावाली, गिद्धावाली और माडाबेला बाढ़ की चपेट में आ गए थे। इन गांवों में चार-चार फुट पानी भरा गया था और लोगों ने छतों पर शरण ली।
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बरसाती नदियों के उफान से देहात में करीब 30 गांवों का संपर्क कट गया। बिजली के पोल बहने से गांवों में अंधेरा छाया हुआ है। लक्सर के बाढ़ प्रभावित गांवों में एनडीआरएफ की टुकड़ी राहत कार्यों में लगी है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. नरेश चौधरी ने बताया कि शनिवार शाम तक रेस्क्यू कर करीब 50 बीमार और बुजुर्ग लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

तीस हजार की आबादी घरों में कैद

लक्सर। पहाड़ों पर लगातार बारिश से उफनाई गंगा ने एक बार फिर खादर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। शुक्रवार सुबह बढ़े जलस्तर और शनिवार सुबह शेरपुर बेला में तटबंध टूटने के कारण क्षेत्र के 14 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे।

इनमें कलसिया, डुमनपुरी, बालावाली, शेरपुर बेला, दाबकी खेड़ा और माड़ाबेला आदि गांवों में करीब चार फीट तक पानी भर गया। करीब 30 हजार की आबादी घरों में कैद होकर रह गई। लोग घरों की छतों पर किसी तरह रात गुजार रहे हैं।

एनडीआरएफ और आपदा नियंत्रण दल की टीमों ने अलग-अलग जगहों से करीब 35 लोगों को सकुशल बाहर निकाला। डुमनपुरी गांव के 50 से ज्यादा परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है।

इसके अलावा शेरपुर बेला के भी 250 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी की जा रही है। क्षेत्र में पचास हजार से ज्यादा बीघा खेतों में फसलें जलमग्न हैं। पूरे खादर क्षेत्र का संपर्क तहसील से कट गया है।

सात घंटे पेड़ों पर चढ़े रहे, तब बची जान

लक्सर। कलसिया निवासी रोहतारश, परवेश, मोहन सिंह, रामवीर, नीटू, संयोद आदि ग्रामीण तेज बहाव में फंस गए।

स्थिति यह रही कि आधे शरीर से भी ऊपर तक पानी बह रहा था। इस कारण उन्हें जान बचाने के लिए पेड़ों पर चढ़ना पड़ा। रामवीर ने बताया कि वे करीब सात घंटे तक पेड़ों पर चढ़े रहे। बाद में जब पानी कम हुआ तो गांव की ओर लौटे।

पहले कलसिया और डुमनपुरी डूबे
शुक्रवार सुबह गंगा में बढ़े जलस्तर से सबसे पहले खानपुर क्षेत्र के सुदूर कलसिया और डुमनपुरी गांव में सैकड़ों घरों में पानी भर गया। उस समय गांव के कई लोग अपने खेतों पर काम करने जा चुके थे।

जलस्तर बढ़ने से ये लोग खेतों में ही फंस गए। घरों में पानी घुसने पर वहां मौजूद महिलाएं, बच्चे और पुरुष शोर मचाते हुए घरों का सामान बचाने में जुट गए, लेकिन अधिकतर सामान बचाया नहीं जा सका। घरों में पानी के कारण अधिकतर लोगों ने अपना आशियाना छतों पर बना लिया।
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तेज बहाव में बही चार युवतियां

लक्सर। ग्राम कलसिया में चारों तरफ पानी भर जाने के कारण खेत में घास लेने गई चार स्कूली छात्राएं तेज बहाव में बह गई। शोर सुनकर आसपास काम कर रहे ग्रामीणों ने उन्हें बमुश्किल बचाया।

शुक्रवार दोपहर के समय राधा पुत्री रामपाल, पूजा पुत्री भज्जड़, रेशमा और बबली पुत्री बालेश खेतों में घास काटने गई थी। अचानक बढ़े जलस्तर में चारों नदी के बहाव में बहने लगीं। उन्होंने शोर मचाया तो आसपास काम कर रहे मल्लू, दयाराम, भरत सिंह और आदेश आदि ग्रामीणों ने उन्हें दौड़कर बचा लिया।

25 गांवों में खौफ
शेरपुर बेला का तटबंध टूटने के साथ ही सोपरी के पास स्थित तटबंध पर भी खतरा मंडराने लगा है जिसके कारण आसपास के करीब 25 गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
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