हाइपोथर्मिया की शुरूआत में थकान, उलझन (कंफ्यूजन), शरीर में कंपकंपी, सांस चढ़ना, बोलने में परेशानी होनी व आवाज स्पष्ट न निकलना और त्वचा ठंडी व फीकी पड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं। परेशानी बढ़ने पर रुक-रुककर कंपकंपी होना, शरीर ठंडा पड़ना, मांसपेशियों में अकड़न, नब्ज धीमी होना, सांस फूलना और सांस लेने में कठिनाई होना, शरीर में थकान, कमजोरी और नींद ज्यादा आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
ऐसे करें हाइपोथर्मिया से बचाव
-शरीर को ठंडा होने से बचाएं और गर्म रखें। ठंड में व्यायाम करने से बचें।
-पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और ठंड में रहने से बचें। टोपी, स्कार्फ, मोजे जरूर पहनें।
-खाना गरम खाएं और पानी भी गरम पिएं।
-गीले कपड़े बिल्कुल भी न पहनें।
-ठंड ज्यादा लगने पर तुरंत शरीर को गर्म करें। हल्का हाइपोथर्मिया होने पर गर्म कंबल, हीटर, गर्म पानी के बैग का इस्तेमाल शरीर को गर्म करने के लिए करें।
-अधिक पसीना बहाने वाली गतिविधि से बचें।
-जाड़ों में कई बार प्यास नहीं लगती लेकिन शरीर में पानी की कमी रहती है। इसलिए नियमित तौर पर गुनगुना या गर्म पानी पीते रहें।