आज के युवाओं में बढ़ती अधीरता को आधुनिक युग की एक बड़ी समस्या बताते हुए युवाओं को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी। रामकथा के कई प्रसंगों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी रामकथा प्रतीकों पर केंद्रित है।
रामकथा के प्रतीकों को समझना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) माया है और इसका अस्तित्व हमारी संस्कृति में बहुत पहले से है। यदि युवाओं को मायावी और मायापति के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से पता होगा तभी वे एआई का सकारात्मक उपयोग कर पाएंगे।
डॉ. कुमार विश्वास की रामकथा को सुनने के लिए हरिद्वार व देहरादून जैसे आसपास के स्थानों से लेकर दिल्ली, गुड़गांव, उज्जैन और चंडीगढ़ जैसे दूरस्थ स्थानों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे।