केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण की बड़ी बाधा दूर हो गई है। धाम क्षेत्र में अपने क्षतिग्रस्त भवनों को ढहाने का विरोध कर रहे 18 पुरोहित अब भवनों के ध्वस्तीकरण को तैयार हो गए हैं।
इसलिए मंदिर के आसपास के भवनों को ध्वस्त करने का सिलसिला भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही रविवार (15 फरवरी) से केदारनाथ में दूसरे चरण का काम भी शुरू हो गया है। निर्माण में जुटी निम मानसून से पहले ही केदारनाथ में सुरक्षा दीवार बनाने के साथ ही घाटों का निर्माण, दो पुल और करीब 4500 लोगों के रहने के लिए प्री फेब्रीकेटेड भवन बनाने की तैयारी में है।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के सूत्रों के मुताबिक रविवार को सरकारी भवनों के ध्वस्तीकरण का काम भी पूरा कर लिया गया। अब केदारनाथ में अड़चन है तो निजी संपत्तियों के ध्वस्तीकरण की। 15 फरवरी से निर्माण का दूसरा चरण भी शुरू हो गया। इसके तहत अब यात्रा की तैयारी का सिलसिला भी शुरू होगा। इस बार यात्रा अप्रैल माह में ही शुरू हो रही है।
ये होगा निर्माण कार्य
रविवार को जिन 18 पुरोहितों ने अपने भवनों के ध्वस्तीकरण की मंजूरी दी है उनमें से ज्यादातर वे हैं जिनके भवन आपदा में या तो पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं या फिर मंदिर से कुछ दूर स्थित हैं। लेकिन निर्माण में जुटी एजेंसी निम इसे एक बेहतर संकेत मान रही है।
कारण यह भी है कि केदारनाथ में अभी तक 36 भवन ध्वस्त किए जा चुके हैं पर इनमें से एक भी भवन पुरोहितों का नहीं है, जबकि मंदिर के आसपास अधिकतर संपत्ति इन्हीं की है। माना जा रहा है कि जल्द ही मंदिर के आसपास के संपत्ति मालिक पुरोहितों से भी सहमति मिल जाएगी।
इसके लिए रविवार को बाकायदा एक बैठक भी हुई। दूसरे चरण के निर्माण में निम को जो अहम काम करने हैं उसमें से बरसात से पहले मंदाकिनी और सरस्वती नदी के मिलन केंद्र पर घाट बनाने के साथ ही मंदिर के सामने करीब 50 फीट चौड़ा रास्ता और साढ़े चार हजार लोगों की रिहायश के लिए प्री फेब्रीकेटिड भवन निर्माण शामिल हैं।
निर्माण कार्य
- सरस्वती नदी पर दो पुल, एक भैरव मंदिर को जाने के लिए। बीच में एक पुल और ढाल स्थिरीकरण
- मंदाकिनी और सरस्वती के संगम स्थल पर घाट का निर्माण, रेलिंग, चेंज ओवर रूम
- प्री फेब्रीकेटेड कोटेज, केदारनाथ, बेस कैं प और लिंचौली को मिलाकर करीब 4500 हजार लोगों के रहने के लिए स्थान और अन्य तरह की सुविधा
- मंदिर के पीछे से तीन स्तर की सुरक्षा दीवार
कोशिश होगी कि मानसून सीजन से पूर्व यह काम पूरा कर लिया जाए। काम लगातार जारी है। फरवरी में ही बहुत कुछ काम कर लिया जाएगा। प्रशासन सहित पुरोहितों से अब सकारात्मक सहयोग भी मिल रहा है।
- कर्नल अजय कोठियाल, प्रधानाचार्य नेहरू पर्वतारोहण संस्थान
शिवरात्रि पर घोषित होगी कपाट खुलने की तिथि
केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की घोषणा 17 फरवरी को शिवरात्रि के पर्व पर ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में की जाएगी। बदरी केदार मंदिर समिति ने इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली है।
केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की पूजा शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में होती है। छह माह ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा के बाद महाशिवरात्रि पर्व पर केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि निकाली जाती है।
मंदिर के वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी ने बताया कि महाशिवरात्रि को पंचांग पूजन के बाद गणना कर तिथि निकाली जाएगी। इस अवसर पर ओंकारेश्वर मंदिर में भक्तों की ओर से भगवान शिव की विशेष पूजा की जाएगी।
तिथि की घोषणा श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारियों-कर्मचारियों, वेदपाठियों, आचार्यों, तीर्थ पुरोहित और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में की जाएगी।