केदारनाथ में अब उत्तराखंड सरकार की असली परीक्षा होगी। दूसरे चरण में सुरक्षा के काम केदारनाथ में होने है। इस चरण में सरकार को तीर्थ पुरोहितों से भी दो टुक बात करनी होगी।
सौंदर्यीकरण के साथ होंगे सुरक्षा के काम
केदारनाथ में मंदिर के आसपास करीब 18 मकान ऐसे हैं जिनको न गिराने पर पुरोहित समाज अड़ा हुआ है। केदारनाथ के बेहतर नियोजन के लिए इन मकानों का ध्वस्तिकरण भी जरूरी बताया जा रहा है। अब दूसरे चरण में केदारनाथ के सौंदर्यीकरण के साथ ही सुरक्षा के काम भी किए जाने हैं।
केदारनाथ के बेहतर नियोजन के लिए मंदिर के आसपास करीब 18 मकान ऐसे हैं जिनका ध्वस्तिकरण अभी नहीं हो पाया है। दूसरा चरण 15 फरवरी से शुरू करने की बात की जा रही है। मुसीबत यह है कि पुरोहित समाज इन मकानों के ध्वस्तिकरण के लिए तैयार नहीं है।
इनका कहना है कि ये मकान सुरक्षित हैं और इनको नहीं छेड़ा जाना चाहिए। दूसरी तरफ केदारनाथ में दूसरे चरण में मंदिर के सामने रास्ते के साथ ही सीवर और अन्य व्यवस्थाएं भी होनी है। देवदर्शनी से मंदिर का पूरा दृश्य दिखाई देने के लिए जरूरी है कि इन मकानों को ध्वस्त किया जाए।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले को लेकर पुरोहित समाज के साथ एक और दौर बातचीत का हो सकता है। खुद मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर पहल कर सकते हैं।
दूसरी ओर केदारनाथ में जुटी निर्माण ऐजेंसियों का कहना है कि यह काम फरवरी माह तक हो जाना चाहिए। कारण यह भी है कि यह दूसरा चरण अधिक से अधिक बरसात तक ही खिंच सकता है। इस दौरान केदारनाथ में सुरक्षा कार्य केअतिरिक्त घाट भी बनाए जाने हैं।
क्या-क्या हुआ काम
केदारनाथ में पहले चरण में रामबाड़ा से लेकर केदारनाथ तक का रास्ता तैयार किया जा चुका है। मंदाकिनी और सरस्वती अपनी मूल धाराओं में हैं। केदारनाथ में 750 वर्ग मीटर का एमआइ 26 के लिए हैलीपैड तैयार किया गया और 280 वर्ग मीटर का एक और हैलीपैड बनाया जा चुका है।
केदारनाथ के रास्ते पर चार पुल बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा रास्ते में 34 रेन सेल्टर, 36 दुकानें और दो बैली ब्रिज भी हैं। लिंचौली में एक हैलीपैड भी तैयार किया गया।