माना जा रहा है कि उस वक्त ही पंजाब में बदलाव की पटकथा लिख दी गई थी। इस बीच कैप्टन और बगावती तेवर दिखा रहे नेताओं को कुछ मसलों को सुलझाने के लिए समय दिया गया था, लेकिन मामला सुलझ नहीं पाया था।
कांग्रेस आलाकमान के भरोसेमंद सिपहसालार माने जाने वाले हरीश रावत शुरू से ही पंजाब के सियासी घटनाक्रम के केंद्र में थे। अंत में हरीश रावत ने ही रविवार को ट्वीट के जरिए खुद चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की जानकारी दी। उस वक्त तक सबकुछ सुखजिंदर रंधावा के पक्ष में चल रहा था।
सियासी पिच पर एक बार फिर हरीश ने दिखाया अपना हुनर
खांटी सियासतदां हरीश रावत ने रणनीतिक कौशल दिखाते हुए कैप्टन (अमरिंदर सिंह) को आउट कराकर पार्टी नेतृत्व के पांव में लंबे समय से चुभ रहा कांटा निकालने में कामयाबी हासिल की। दिग्गज अमरिंदर को सत्ता से हटा पाना इतना आसान नहीं था। वैसे उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रचार की अगुवाई कर रहे रावत ने कांग्रेस आला कमान से गुजारिश की थी कि उन्हें पंजाब के प्रभार से मुक्त कर दिया जाए। लेकिन उनके व्यापक सियासी अनुभव को देखते हुए आला कमान ने इसकी इजाजत नहीं दी। पंजाब के सियासी मसले को सुलझाने का इनाम भी उन्हें मिल सकता है।