रेगुलर बेल के लिए निचली अदालत में प्रार्थनापत्र देने के लिए तीन दिन की अवधि खत्म होने के बावजूद यौन शोषण के आरोपी प्रदीप सांगवान ने सरेंडर नहीं किया।
दुराचार और अश्लील क्लिपिंग बनाने का आरोप
माना जा रहा हे कि वह बेल के लिए समय सीमा बढ़वाने के लिए फिर सुप्रीम कोर्ट जा सकता है।
सोनीपत के पूर्व सांसद के पुत्र और सहस्त्रधारा स्थित वाटर पार्क ज्वायलैंड के मालिक प्रदीप पर बिजनौर (यूपी) निवासी युवती से दुराचार और अश्लील क्लिपिंग बनाने का आरोप है।
युवती सांगवान के वाटर पार्क में कर्मचारी थी। शनिवार को सांगवान ने न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय सिमरनजीत कौर की अदालत में जमानत अर्जी दी, जो खारिज हो गई थी।
अदालत ने साफ किया था कि सांगवान के सरेंडर किए बिना अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकती।
माना जा रहा था कि प्रदीप रेगुलर बेल के लिए सुप्रीम कोर्ट से मिली तीन दिन की अवधि के भीतर सोमवार को सरेंडर करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सांगवान ने न तो सरेंडर किया, न ही उसने अदालत में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र दिया।
अब हो सकती है गिरफ्तारी
सुप्रीम कोर्ट ने एक जुलाई को दिए आदेश में सांगवान की गिरफ्तारी पर 15 जुलाई तक रोक लगा दी थी।
अब सांगवान के सरेंडर न करने के बाद अगर सुप्रीम कोर्ट ने उसे राहत नहीं दी तो पुलिस 15 जुलाई के बाद उसे गिरफ्तार कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 में दो मामलों केएल वर्मा केस एवं सुनीता देवी बनाम स्टेट ऑफ बिहार प्रकरण में कहा है कि रेगुलर बेल के लिए आरोपी को सरेंडर करना ही होगा। बिना सरेंडर किए जमानत नहीं दी जा सकती है। सांगवान ने बिना सरेंडर के ही जमानती प्रार्थनापत्र दिया था। इसीलिए यह खारिज हो गया।
- चंद्रशेखर तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता