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मुथूट फाइनेंस में डकैती के प्रयास में एक दबोचा, नौ फरार

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मुथूट फाइनेंस गोल्ड लोन की शाखा में हुए डकैती के प्रयास में पुलिस ने एक आरोपी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। इसके नौ साथियों को पुलिस तलाश कर रही है। गैंग में कुछ नेपाली मूल के आरोपी भी हैं जो रेकी का काम करते थे। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
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डीआईजी /एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने बताया कि घटना 20 जनवरी की है। प्रिंस चौक स्थित शाखा के बाहर तैनात गार्ड को कुछ लोगों ने बंधक बनाया था। इसके बाद बदमाशों ने शटर को गैस कटर से काटा और फिर स्ट्रांग रूम में घुसने का प्रयास किया लेकिन, स्ट्रांग रूम नहीं कट सका। पकड़े जाने के डर से आरोपी यहां से विक्रम पकड़कर हरिद्वार के रास्ते अपने-अपने ठिकानों पर चले गए।
पुलिस तब से आरोपियों के बारे में जानकारी जुटा रही थी। इस बीच एसओजी और कोतवाली पुलिस को जानकारी मिली कि एक आरोपी चेन्नई से दिल्ली आने वाला है। पुलिस ने आरोपी आलम निवासी नारायणपुर पश्चिमी हसनटोला, राजमहल झारखंड को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने बताया कि इस घटना में उसके नौ साथी और भी शामिल थे। इसके बाद पुलिस ने इस मामले को लूट के प्रयास के स्थान पर डकैती के प्रयास में तरमीम कर लिया। खुलासा करने वाली टीम को पुलिस कप्तान ने 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
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ये हैं फरार
- शाहिद शेख निवासी साहिबगंज, झारखंड
- असरूद्दीन शेख निवासी साहिबगंज, झारखंड
-शमीम निवासी साहिबगंज, झारखंड
- जाकिर सुनार निवासी साहिबगंज, झारखंड
- संतोष ऐडी निवासी नेपाल
- इशोर बहादुर निवासी नेपाल
- राम बहादुर थापा निवासी नेपाल
- गणेश बहादुर थापा निवासी नेपाल
- वीरेन्द्र साउद निवासी नेपाल
बार में काम करने वाले नेपाली मूल के व्यक्ति ने की थी रेकी
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उनकी गैंग में बहुत से लोग नेपाल के रहने वाले हैं। यह सब विभिन्न जगहों पर चौकीदारी करते हैं। आरोपी के अनुसार सभी लोग नेपाली मूल के व्यक्तियों पर विश्वास करते हैं। ऐसे में उन्होंने पड़ोस में ही एक बार में काम करने वाले नेपाली मूल के व्यक्ति से संपर्क किया था। उसने ही इस शाखा के बारे में बताया था। इसके बाद उन्होंने घटना को अंजाम देने का प्रयास किया।
सुनार, फाइनेंसर, फ्रेब्रिकेटर सब हैं गैंग में
यह गैंग बैंकों और गोल्ड लोन शाखाओं में ही लूट की घटनाओं को अंजाम देते हैं। बताया जा रहा है कि गैंग में 20 से अधिक लोग शामिल हैं। इनमें कुछ फाइनेंसर हैं, जो इन्हें आने-जाने के लिए पैसा मुहैया कराते हैं जबकि एक सुनार है। इस सुनार का काम लूट में मिले सोने की गुणवत्ता को जांचना होता है। साथ ही कुछ लोग फेब्रिकेटर हैं जिनका काम गैस कटर से शटर और स्ट्रांग रूम को काटना होता है।
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बच गया 35 करोड़ रुपये का सोना
पुलिस के अनुसार जिस दिन घटना हुई उस समय वहां पर कम से कम 35 करोड़ रुपये का सोना रखा हुआ था। ऐसे में स्ट्रांग रूम की मजबूती के कारण यह सब सोना बच गया।
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