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गड़बड़झाला! राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को आउटसोर्स पर बांट दी नौकरियां, जांच के आदेश

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देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्तियों में गड़बड़ी सामने आई है। टाइगर रिजर्व निदेशक से की गई शिकायत में विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को आउटसोर्स कर्मचारियों के रूप में नियुक्तियां दीं। अधिकारियों ने प्रावधानों को दरकिनार करते हुए टाइगर रिजर्व के स्थायी कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासों को भी आउटसोर्स कर्मचारियों को आवंटित कर दिया। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह ने जांच का आदेश दिया है। उन्होंने टाइगर रिजर्व के सभी रेंजों के वन क्षेत्राधिकारियों से उनके रेंज में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के नाम पते के साथ ही पूरा ब्योरा मांगा है।
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दरअसल, पौड़ी गढ़वाल के मल्ला गंगा भोगपुर निवासी गोपाल सिंह ने राजाजी टाइगर रिजर्व निदेशक से की शिकायत में आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व के कई अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को आउटसोर्स पर नियुक्तियां दे दी। उनको स्थायी कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासों का भी आवंटन कर दिया है। स्थिति यह है कि स्थायी कर्मचारी किराये के मकानों में रह रहे हैं जबकि आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
दूसरी ओर टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह का कहना है कि आरोपों को लेकर जांच शुरू कर दी गई है। सभी वन क्षेत्राधिकारियों से उनके रेंजों में कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया है। यदि वाकयी में अधिकारियों ने प्रावधानों को दरकिनार कर अपने रिश्तेदारों को नौकरियां दी हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब राजाजी टाइगर रिजर्व कर्मचारियों की नियुक्तियां विवादों के घेरे में है। कई साल पूर्व टाइगर रिजर्व में 21 कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। शासन के निर्देश पर तत्कालीन टाइगर रिजर्व निदेशक सनातन के स्तर पर प्रकरण की जांच करायी गई थी। नियुक्तियों को न सिर्फ निरस्त किया गया था वरन विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई थी।
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