राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों की तमाम प्रजातियों का नए सिरे से जुलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारतीय प्राणि सर्वेक्षण के अध्ययन के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही उत्तराखंड वन विभाग ने भी मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय वन मंत्रालय एवं उत्तराखंड वन विभाग की ओर से वन्यजीवों के अध्ययन को लेकर मंजूरी देने के बाद भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के विशेषज्ञ केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में वर्तमान में पाए जाने वाले वन्यजीवों के साथ विलुप्त हो चुके वन्यजीवों का अध्ययन करने में जुट गए हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य है। अभयारण्य में वैसे तो कस्तूरी मृग, पीले गले वाले मार्टेन, तेंदुए, सियार, हिम तेंदुए, हिमालयी काला भालू, जंगली सूअर समेत ही पक्षियों और सरीसृपों की कई प्रजातियां हैं। वन्यजीवों में कस्तूरी मृग सबसे प्रमुख हैं, लेकिन पिछले दो-तीन दशक के बीच अभयारण्य में वन्यजीवों की कई प्रजातियां या तो विलुप्त हो चुकी हैं या कई प्रजातियों के वन्यजीव केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य से पलायन कर और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चले गए हैं।
भारतीय प्राणि सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की माने तो चारधाम यात्रा के दौरान अधिक मानवीय गतिविधियों के साथ ही अभयारण्य क्षेत्र से सटे इलाकों में सड़कों के निर्माण कार्य समेत कई अन्य विकास कार्यों के चलते केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के वन्यजीवों के रहने पर सीधा असर पड़ा है, जिससे वन्यजीवों का अभयारण्य से या तो पलायन हो रहा या कई वन्यजीव खत्म होने की कगार पर हैं। इसी के मद्देनजर भारतीय प्राणि सर्वेक्षण क्षेत्रीय उत्तरी क्षेत्र की ओर से अभयारण्य में वन्यजीवों के अध्ययन को लेकर एक प्रस्ताव केंद्रीय वन, पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ ही वन विभाग उत्तराखंड विभाग को भेजा गया था। केंद्रीय वन मंत्रालय के साथ ही उत्तराखंड वन विभाग ने वन्यजीवों के अध्ययन को लेकर मंजूरी दे दी है।
भारतीय प्राणि सर्वेक्षण के क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. गौरव शर्मा के मुताबिक, केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में तीन साल तक अध्ययन करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अध्ययन के बाद ही इस बात का पता चल सकेगा कि वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों की कितनी प्रजातियां वर्तमान में मौजूद हैं और कितनी प्रजातियां या तो विलुप्त हो चुकी हैं या फिर वन्यजीव अभ्यारण्य से पलायन कर चुकी हैं।
967 वर्ग किमी में फैला है अभयारण्य
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना 1972 में की गई थी। अभयारण्य चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में 967 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। अभयारण्य में प्रमुख वन्य जीवों में कस्तूरी मृग भी शामिल हैं, जो दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों में से एक है। इसके अलावा अभयारण्य में अल्पाइन, कोनिफेरस, चीड़, ओक समेत वनस्पतियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं।
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों के अध्ययन को लेकर प्रस्ताव केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा गया था। फिलहाल वन मंत्रालय के साथ उत्तराखंड वन विभाग ने अभयारण्य में वन्यजीवों के नए सिरे से अध्ययन को मंजूरी दी है। संस्थान के वैज्ञानिक तीन साल तक 967 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले अभयारण्य में पाए जाने वाली सभी प्रजातियों के वन्यजीवों का अध्ययन करेंगे। पता लगाया जाएगा कि वन्यजीवों की कई प्रजातियां विलुप्त हो गई या कौन सी प्रजातियाें ने पलायन किया, या कौन सी प्रजाति के वन्यजीव विलुप्त होने के कगार पर हैं।
- डॉ. गौरव शर्मा, प्रभारी अधिकारी, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, उत्तरी क्षेत्र