देहरादून। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में गरीबों के लिए एक भी नया आवास नहीं बन सका है। इस दौरान केवल राजधानी दून की तीन परियोजनाएं पूरी र्हुईं, जिन पर काफी पहले काम शुरू हो गया था। इसके बाद ज्यादातर योजनाओं पर काम ही शुरू नहीं हुआ। अब केंद्र सरकार ने 11 आवासीय परियोजनाएं के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके तहत 10 हजार से ज्यादा गरीबों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद के अभी तक केवल राजधानी दून में ट्रांसपोर्ट नगर, आमवाला तरला और धौलास के ही प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश में एक भी योजना पर काम नहीं हुआ। ज्यादातर प्रोजेक्ट के प्रस्ताव सिस्टम के फेर में फंसे हुए हैं। परियोजना के तहत राज्य में कुल 10872 इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) के आवास बनने प्रस्तावित हैं। अब मंगलौर, काशीपुर, किच्छा, रुद्रपुर, हरिद्वार और ज्वालापुर में मंजूरी की कार्यवाही चल रही है, जिन पर अगले दो माह में काम शुरू करने का दावा है। इसके अलावा कुछ डेवलपर की ओर दी गई डीपीआर भी आपत्तियां लगने के चलते खारिज हो चुकी है। अब ग्राहकों की जरूरत को देखते हुए उसके अनुसार संशोधन के लिए कहा जा रहा है।
बिल्डर नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
परियोजना में ज्यादातर बिल्डर बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। दरअसल योजना के तहत बनने वाले फ्लैट बेहद कम कीमत पर ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे बिल्डरों को बहुत अधिक फायदा नहीं हो रहा है। परिषद के अधिकारियों के अनुसार बिल्डरों को तय कीमत पर ही ग्राहकों को फ्लैट उपलब्ध कराने हैं।
ढाई लाख रुपये की सब्सिडी
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट खरीदने वालों को सरकार ढाई लाख रुपये की सब्सिडी देती है। केंद्र सरकार की ओर से एक लाख और राज्य सरकार की ओर से डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है। योजना के अलावा जो आवासविहीन लोग अपना आवास लेते हैं, उन्हें भी ढाई लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है।