नीट के परिणाम दून के शर्मा परिवार के लिए दोहरी खुशी लेकर आए। उनके बेटे कार्तिकेय ने 680 अंक हासिल कर देशभर में 973वां स्थान हासिल किया। कुछ दिन पूर्व उनके जुड़वा भाई विनायक ने जेईई एडवांस में करीब 11 हजार रैंक हासिल की थी।
कार्तिकेय ने इसी साल दून इंटरनेशनल स्कूल से 92.2 फीसदी अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण की थी। कार्तिकेय के पिता डॉ. पंकज शर्मा स्वास्थ्य महानिदेशालय में तैनात हैं। मां मधु शर्मा गृहिणी हैं। कार्तिकेय ने बताया कि बचपन में अपने पिता को देखकर उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा। अविरल क्लासेस के निदेशक डीके मिश्रा ने नौवीं कक्षा से उन्हें तैयारी करने की सलाह दी। चार साल की कड़ी मेहनत के बाद कार्तिकेय ने पहले ही प्रयास में रिकॉर्ड अंक हासिल किए।
कार्तिकेय पढ़ाई के अलावा गीत-संगीत, वाद-विवाद में भी पूरी दिलचस्पी लेते हैं। सोशल मीडिया से उन्होंने दूरी बनाकर रखी है। कार्तिकेय का कहना है कि सोशल मीडिया कुछ देर के लिए खुशी देता है, लेकिन तैयारी करने वालों को इस पर अपना समय बर्बाद करने से बचना चाहिए। हर विषय पर फोकस कर पढ़ना, एनसीईआरटी से तैयारी, टापिक वाइज पढ़ाई और नियमित अभ्यास फायदेमंद होता है।
प्रोटेस्ट कैंसर पीड़ित वाहन चालक पिता की बिटिया मीनाक्षी ने नीट में 555 अंक हासिल कर परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है। बेहद अभावों में पली मीनाक्षी ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। पिछले वर्ष मीनाक्षी ने 529 अंक हासिल किए थे। इसके बाद उसने पूरे साल मेहनत के साथ पढ़ाई की और करीब 26 अंकों की बढ़ोत्तरी के साथ नीट क्वालिफाई कर लिया।
मूलत: पौड़ी गढ़वाल के गैंडखाल निवासी मीनाक्षी का परिवार हरिद्वार में रहता है। अभावों के कारण मीनाक्षी के लिए कोचिंग कर पाना आसान नहीं था। उसने मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए तैयारी की और सफलता हासिल कर ली।
पहले साल 529 अंक हासिल करने के बाद मीनाक्षी ने दोगुनी मेहनत की। मीनाक्षी ने नियमित तौर पर पांच से छह घंटे की पढ़ाई की। इसमें उन्होंने किसी तरह का समझौता नहीं किया।