आरएसएस समाज और संगठन के बीच मजबूत सेतु तैयार करने की कवायद में जुटा हुआ है। संगठन का मानना है कि धर्म जागरण, ग्राम विकास, गो संवर्द्धन, कुटुंब प्रबोधन, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और सामाजिक सद्भाव जैसे कार्यक्रमों के जरिये आम लोगों तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। संघ का प्रयास है किइन सात कार्यक्रमों से जुड़ा कोई न कोई कार्यक्रम हर गांव में जरूर हो।
संघ पहली बार ऐसा परिवार प्रबोधन कार्यक्रम करने जा रहा है, जिसमें एक-दो नहीं बल्कि एक हजार परिवार जुटेंगे। इसके लिए व्यापक तैयारियां की गईं हैं। करीब एक पखवाड़े पहले वार्ड से लेकर गांवों तक में हर परिवार तक संघ के कार्यकर्ता पहुंच चुके हैं। इनमें परिवार का चयन करने से लेकर एप के माध्यम से पंजीयन कराने संबंधी प्रक्रिया को पूरा कराया गया। कार्यक्रम में परिवार के साथ लोग आरएसएस सरसंघ चालक मोहन भागवत को देख-सुन सकेंगे। यह कार्यक्रम सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव भी दिखाया जाएगा।
समाज में अपना आधार और मजबूत करने के साथ ही संगठन विस्तार को लेकर भी संघ मंथन कर रहा है। आरएसएस के सात कार्यक्रम इसी उद्देश्य से तय किए गए हैं। कार्यक्रम में जल एवं पर्यावरण जैसे नए विषयों को जोड़ा गया है। इसके तहत जल और पर्यावरण की दिशा में काम करने वाले लोगों को संघ से जोड़ने की मंशा है। पारस्परिक सहयोग से समाज के लिए और क्या बेहतर किया जा सकता, ये संभावनाएं भी तलाशी जा रहीं हैं।
स्थानीय रोल मॉडलों (अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट तौर पर कार्य कर रहे लोग) के जरिये भी दूसरों को प्रेरित करने की योजना है। बताया जा रहा है कि भागवत के तीन दिन के प्रवास के दौरान संघ के सात कार्यक्रमों की समीक्षा होगी और आगे की कार्ययोजना पर मंथन होगा। संघ के एक पदाधिकारी का कहना है कि सात कार्यक्रमों में से कम से कम एक कार्यक्रम हर गांव में हर हाल में कराया जाना है।