सुनने में यह बिल्कुल फिल्मी कहानी जैसा है। 56 बरस पहले जिस कंपनी से 23 साल के एक नौजवान ने मरीन इंजीनियर के रूप में करिअर की शुरुआत की थी, आज अस्सी बरस की उम्र में वह उसी कंपनी को खरीदने की तैयारी में हैं।
कंपनी है देश का सबसे प्रतिष्ठित जहाजरानी प्रतिष्ठान 'शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया' और उसे खरीदने चले हैं लंदन के जाने माने फोरसाइट ग्रुप के संस्थापक रवि कुमार मेहरोत्रा। कहानी को और रोचक यह बात बनाती है कि उसकी पटकथा सात दशक पहले कानपुर में लिखी गई थी। रवि कुमार मेहरोत्रा न सिर्फ कानपुर में जन्मे और पढ़े-बढे़। लगभग 1500 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार वाला फोरसाइट ग्रुप शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में भारत सरकार के 64 फीसदी हिस्से की नीलामी में शामिल होने वाले अग्रणी नामों में शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में फोरसाइट ग्रुप एक जाना पहचाना नाम है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के परिवहन में माहिर यह ग्रुप शिपिंग के अलावा ड्रिलिंग और फुटवियर इंडस्ट्री में भी सक्रिय है। गुजरात के भावनगर में फोरसाइट समूह दुनिया का पहला सीएनजी टर्मिनल तैयार कर रहा है। वर्ष 1964 से लेकर अगले बीस साल तक शिपिंग कॉर्पोरेशन में ही काम करने वाले मेहरोत्रा ने दस साल तक महत्वाकांक्षी भारत-ईरान तेल पाइपलाइन परियोजना का कार्यभार संभाला था।
वर्ष 1984 में उन्होंने फोरसाइट समूह की नींव रखी और जहाजों के छोटे बेड़े से काम शुरू किया। उसके बाद तीस साल की अवधि में वह समूह को इस मुकाम तक ले आए हैं। फोरसाइट समूह के संस्थापक व कार्यकारी अध्यक्ष रवि कुमार मेहरोत्रा और उनकी बेटी समूह की डिप्टी चेयरपर्सन मंजरी मेहरोत्रा सेठ के साथ अमर उजाला के कार्यकारी संपादक संजय अभिज्ञान की विशेष बातचीत के अंश पेश हैं...
- फोरसाइट समूह की भविष्य की रणनीति में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का स्वामित्व कितना अहम है?
रवि मेहरोत्रा: जितना अहम भारत के लिए स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना है उतना ही अहम फोरसाइट ग्रुप के लिए शिपिंग कॉर्पोरेशन है। जलवायु रक्षा की पेरिस संधि में अपने वादे के मुताबिक भारत को अगले दस बरस में अपनी कुल ऊर्जा खपत में नेचुरल गैस का अनुपात मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक ले जाना है। नेचुरल गैस पर्यावरण रक्षा के नजरिए से स्वच्छ ईंधन है। कोयला, लकड़ी और कैरोसिन जैसे विकल्प प्रदूषणकारी होते हैं। उन पर निर्भरता घटाना आवश्यक है। दिक्कत यह है कि एशिया में नेचुरल गैस के भंडार मौजूद होने के बावजूद समुद्री दूरी के कारण भारत को पर्याप्त मात्रा में एलएनजी नहीं मिल पाती। भारत में मांग बहुत है। उधर गल्फ में गैस बहुत है। बीच में फासला कम करने के लिए खास तकनीक से लैस जहाज चाहिए जो शून्य से बहुत नीचे के तापमान पर तरल की गई गैस को हजारों किलोमीटर दूर भारत के बंदरगाहों तक पहुंचा सके। ठीक इसी काम में फोरसाइट समूह की महारत है।
मंजरी मेहरोत्रा सेठ: हम चाहते हैं कि शिपिंग कॉर्पोरेशन का ढांचा और हमारी विशेषज्ञता का संगम हो और आने वाले दस बरस में शिपिंग कॉर्पोरेशन भारत ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी परिवहन बेड़ा बनकर उभरे। जाहिर है कि देश के हजारों नौजवानों के रोजगार के शानदार अवसर इस गठजोड़ से पैदा होंगे।
-शिपिंग कॉर्पोरेशन जैसे विराट नेटवर्क वाला संस्थान खरीदने के लिए फोरसाइट समूह कितना तैयार है?
रवि मेहरोत्रा: देखिए हमारा सत्तर फीसदी कारोबार शिपिंग से ही आता है। दुनिया भर में हमारे कंटेनर, टैंकर और बल्क कैरियर जहाज परिवहन सेवा में लगे हैं। लगभग पच्चीस फीसदी कारोबार ड्रिलिंग से और केवल पांच फीसदी फुटवियर जैसी अन्य इकाइयों से है। आबूधाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दो रिग हम ऑपरेट करते हैं। ओएनजीसी के लिए चार ऑफशोर रिग और ऑयल इंडिया के लिए एक लैंड रिग का आपरेशन भी हमारे पास है। भावनगर में हम दुनिया का पहला सीएनजी टर्मिनल लगा रहे हैं। शिपिंग कॉर्पोरेशन की नीलामी के लिए हम एक व्यावसायिक गुट यानी कंसोर्शियम में शामिल हैं। इसमें बेल्जियम की एक्समार एनवी और दुबई की जीएमएस शामिल है। फंडिंग का प्रबंध हो चुका है। अनुभव और तकनीकी दक्षता भी मौजूद है। ब्रिटेन, यूएइई, चीन, सिंगापुर और भारत में हमारी खासतौर पर व्यावसायिक उपस्थिति है। कुल मिलाकर हमारी तैयारी पूरी है।