सोहराब अली कहते हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है, बशर्ते मेहनत और ईमानदारी से किया जाए। चाय का ठेला लगाने का आइडिया उन्हें बहुत पहले आया था। बस एक खास तरह के नाम और चाय बनाने के तरीके का इंतजार था, जो एलएलबी चाय वाले के नाम से पूरा हो गया है।
वह बताते हैं कि यह नाम रखने के पीछे मकसद है कि अधिक से अधिक छात्रों से जुड़ सकें और उन्हें अलग तरह की चाय पिलाएं। वह भले ही एलएलबी कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में उनका सपना बड़ा व्यवसायी बनना है। उनके परिवार में कई लोग वकील हैं और भाई-बहन भी एलएलबी कर रहे हैं।
सुबह आठ से रात आठ बजे तक मिलती है चाय
यदि आपको एलएलबी चाय वाले की चाय पीनी है तो नए पुल पर आना होगा। सोहराब अली चाय का ठेला सुबह आठ बजे लगाते हैं। भारापुर भौरी निवासी सावेज उनका सहयोग करते हैं। वह भी एक इंटर कॉलेज से 12वीं कर रहे हैं। सुबह आठ से शाम आठ बजे तक चाय मिलती है।
ऐसी बनती है ईरानी और मसाला चाय
सोहराब अली के अनुसार, ईरानी चाय बनाने का एक खास तरीका है। इसमें चाय पत्ती, शक्कर या चीनी और कई मसाले डाले जाते हैं। करीब डेढ़ घंटे तक गैस चूल्हे पर पकाया जाता है। मसाले वाली चाय में भी खास मसाले डाले जाते हैं। यह मात्र 15 मिनट में तैयार हो जाती है। वह बताते हैं कि ईरानी चाय की कीमत 20 और मसाले वाली चाय की कीमत 15 रुपये है। रोजाना डेढ़ सौ कप से अधिक चाय बिक जाती है।