ये दिए निर्देश
- होटल, ढाबा संचालकों को अपने कारीगरों और कर्मचारियों का शत प्रतिशत सत्यापन कराया जाए।
- रसोई में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के लिए संचालकों को प्रोत्साहित किया जाए।
- गश्त और पेट्रोलिंग के दौरान भी ऐसी घटनाओं पर ध्यान दिया जाए।
- समय-समय पर खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर पुलिस होटल, ढाबों की चेकिंग करे।
- ऐसे मामलों में पुलिस एक्ट और बीएनएस की धारा 274 (खाद्य पदार्थों में अपमिश्रण) में मुकदमा दर्ज किया जाए।
- यदि ऐसे मामलों में भाषायी, सांप्रदायिक टकराव होने की संभावना है तो बीएनएस 196(1)(सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले कृत्य) या बीएनएस 299(धार्मिक विश्वास का अपमान) में मुकदमा दर्ज किया जाए।
- स्थानीय निकाय और खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाएं।
दुष्कृत्य के लिए उत्तराखंड में कोई स्थान नहीं
इस तरह के किसी दुष्कृत्य के लिए उत्तराखंड में कोई स्थान नहीं है। यदि कोई ऐसा करते हुए पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की घटनाओं से न केवल खाद्य पदार्थ दूषित होते हैं, अपितु भावनाएं भी आहत होती हैं। इस तरह के कारनामों पर हम कठोर कार्रवाई करेंगे। - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
ये भी पढ़ें...Valley OF Flowers : 15 दिन और कर सकेंगे फूलों की घाटी के दीदार, अभी तक 19,000 पर्यटकों ने देखा दिलकश नजारा