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उत्तराखंड: एशिया का 11वां सबसे ऊंचा बांध बनेगा किशाऊ, नौंवा है टिहरी, एशिया में किस बांध की कितनी ऊंचाई

Wed, 16 Sep 2026 01:26 PM IST
Renu Saklani आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बांध की ऊंचाई इसे देश की ऊंची बांध परियोजनाओं में खास स्थान दिलाएगी। 232 मीटर ऊंचा यह बांध टिहरी के बाद देश का दूसरा सबसे ऊंचा बांध होगा।
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प्रतीकात्मक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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देश के सबसे ऊंचे टिहरी बांध के साथ अब उत्तराखंड-हिमाचल का किशाऊ बांध देश का दूसरा सबसे ऊंचा और एशिया का 11वां सबसे ऊंचा बांध होगा। इसकी ऊंचाई 232 मीटर होगी। ताजिकिस्तान का निर्माणाधीन रोगुन बांध न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया का सबसे ऊंचा बांध है, जिसकी ऊंचाई 335 मीटर होने वाली है।

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किशाऊ परियोजना को केंद्र सरकार ने वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था, जिसके तहत अब 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार ही वहन करेगी। इस बांध से पैदा होने वाली 422 मेगावाट बिजली में से 211 मेगावाट बिजली उत्तराखंड और 211 मेगावाट बिजली हिमाचल प्रदेश को मिलेगी।

एशिया में किस बांध की कितनी ऊंचाई
 
बांध देश ऊंचाई
रोगुन बांध(निर्माणाधीन) ताजिकिस्तान 335 मीटर
शुआंगजिआंगकोउ बांध चीन 315 मीटर
जिन्पिंग1 बांध चीन 305 मीटर
नूरेक बांध ताजिकिस्तान 300 मीटर
शिआओवान बांध चीन 292 मीटर
बैहेतन बांध चीन 289 मीटर
शिलुओदू बांध चीन 285.5 मीटर
नोजहादु बांध चीन 261.5 मीटर
टिहरी बांध भारत 260.5 मीटर
लाक्सिवा बांध चीन 250 मीटर
किशाऊ बांध(प्रस्तावित) भारत 232 मीटर
भाखड़ा नांगल बांध भारत 225.55 मीटर

किस राज्य का कितना होगा खर्च
हरियाणा 478.85 करोड़
उत्तर प्रदेश 298.76 करोड़
उत्तराखंड 38.19 करोड़
राजस्थान 93.51 करोड़
हिमाचल प्रदेश 31.58 करोड़
दिल्ली 60.50 करोड़

32 किमी की होगी किशाऊ की झील, दिल्ली को मिलेगा भरपूर पानी
किशाऊ बांध उत्तराखंड की मुख्य टोंस नदी पर बनेगा, जो आगे जाकर यमुना में मिल जाती है। किशाऊ बांध 232 मीटर ऊंचा और 680 मीटर लंबा होगा, जिससे 422 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इस बांध के बनने से हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। सबसे ज्यादा फायदा देश की राजधानी दिल्ली को होगा, जिससे वहां पानी की आपूर्ति को पूरा किया जा सके। परियोजना के तहत मोहराड़ से त्यूनी तक लगभग 32 किलोमीटर लंबी झील बनाई जाएगी। अभी तक के सर्वे के मुताबिक, इस परियोजना से उत्तराखंड और हिमाचल के 81,300 पेड़, 631 लकड़ी से बने मकान, 171 पक्के मकान, दोनों राज्यों के 632 सामूहिक परिवार और 508 एकल परिवार शिफ्ट होंगे, आठ मंदिर, छह पंचायतें, दो अस्पताल, सात प्राइमरी स्कूल, दो मिडल स्कूल, एक इंटर कॉलेज जलमग्न होंगे।
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1985 में बनी थी पहली डीपीआर

वर्ष 2008 में किशाऊ बांध को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। 1985 में इसकी पहली डीपीआर बनाई गई थी। वर्ष 2010 में परियोजना की डीपीआर दोबारा से तैयार हुई। परियोजना में उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाके की 1452 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। 1562 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता का जलाशय होगा। किशाऊ बांध परियोजना को सरकार ने वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया था। यह उत्तराखंड के देहरादून स्थित टोंस नदी और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के बीच तैयार होने वाली परियोजना है।

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किशाऊ बांध परियोजना की डीपीआर केंद्र को भेज दी गई है। करीब 15 हजार करोड़ की है, जिसमें अभी बदलाव संभव है। अब केंद्र सरकार के स्तर से इस पर निर्णय होना है। उम्मीद है कि वर्ष 2035 तक किशाऊ से बिजली-पानी मिलना शुरू हो जाएगा। यह देश का दूसरा सबसे ऊंचा 232 मीटर का बांध होगा। - एके सिंह, एमडी, किशाऊ कॉरपोरेशन व यूजेवीएनएल
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