इस मुलाकात में किस तरह जितेंद्र नारायण त्यागी को संन्यास दिलाया जा सकता है, इस पर सलाह करते हुए आगे की रणनीति बनाई। श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि जितेंद्र नारायण त्यागी ने अब हिंदू धर्म धारण कर लिया है, इसलिए वह संन्यास धारण कर सकते हैं। जिसके लिए सभी अखाड़ों से वार्ता की जाएगी और जल्द ही उन्हें संन्यास दिलाया जाएगा।
वहीं जितेंद्र नारायण त्यागी निरंजनी अखाड़े के संत बन सकते हैं या नहीं इस सवाल पर बोलते हुए महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि जब कोई हिंदू धर्म धारण कर लेता है तो वह संत भी बन सकता है और हमें ऐसे व्यक्तियों की अति आवश्यकता है, जो समाज के लिए कार्य करना चाहते हैं। जब कोई संत परंपरा में आ जाता है तो वह किसी मजहब का नहीं कहलाता, वह सभी धर्मों के लिए कार्य करता है और सभी धर्मों का भला चाहता है।
वहीं शांभवी धाम पीठाधीश्वरस्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि जब हम जितेंद्र नारायण त्यागी से जेल में मिलने गए थे तब उन्होंने संन्यास लेने की इच्छा जताई थी और अब भी वह संन्यास लेना चाहते हैं, जिसके लिए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी से भेंट की है। उन्होंने बताया कि संन्यास की भी एक परंपरा होती है, जिसमें सभी वरिष्ठ संतो की सहमति अति आवश्यक होती है।