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झारखंड पीसीएस-जे रिजल्ट: जज बनकर पूरा हुआ इनका सपना, दिए तैयारी के लिए खास टिप्स

Sun, 23 Feb 2020 12:13 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • एलएलबी पास करने के बाद जज बनने तक का सफर था चुनौतीपूर्ण
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जज बनने वाले उत्तरांचल विवि के छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बचपन में जज बनने सपना देखा। सपना पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत की। मेहनत अब जज बनने के इनाम के रूप में सामने आई है। कुछ ऐसी ही कहानी है झारखंड की न्यायिक सेवा परीक्षा पास करने वाले उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून के पूर्व छात्रों की।

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घर में वकालत के माहौल से मिली प्रेरणा
उत्तर प्रदेश के झांसी की साक्षी श्रीवास्तव ने बचपन से घर में वकालत का जो माहौल देखा, उससे उन्हें जज बनने की प्रेरणा मिली। साक्षी ने लॉ कॉलेज देहरादून से बीए एलएलबी पास की है।

साक्षी के पिता अरुण कुमार श्रीवास्तव झांसी में वकालत करते हैं जबकि मां मीरा श्रीवास्तव टीचर हैं। साक्षी ने इससे पहले उत्तर प्रदेश पीसीएस-जे की परीक्षा दी, लेकिन इंटरव्यू में सफलता नहीं मिल सकी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। झारखंड की न्यायिक सेवा परीक्षा में कामयाबी हासिल कर ली। उन्होंने बताया कि अब अनुशासन, लोगों को न्याय देना, लंबित वादों का निस्तारण उनकी प्राथमिकता रहेगी।
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ऐसे की तैयारी
साक्षी ने बताया कि उन्होंने सभी बेयर एक्ट का इंडेक्स बनाया। इसे हमेशा साथ रखती थीं। उन्होंने अपनी तैयारी को तीन हिस्सों में बांटा। पहला हिस्सा प्री एग्जाम का था, जिसमें वह रोजाना 200 मल्टीपल च्वाइस प्रश्नों को हल करती थीं। दूसरा हिस्सा मेन एग्जाम का था, जिसमें उन्होंने सबसे पहले पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण किया। इसके बाद रोजाना 10 सवालों का जवाब लिखकर टाइम मैनेजमेंट की प्रैक्टिस की। तीसरा हिस्सा इंटरव्यू का था। इसके लिए उन्होंने साक्षात्कार बोर्ड के सामने बैठने से लेकर रोजाना शीशे के सामने खड़े होकर बोलने की प्रैक्टिस की।

इंटरव्यू में यह पूछे गए थे सवाल
आईपीसी में अनलॉफुल असेंबली, राइट्स एंड अफेयर्स का डिफरेंस, ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट में डॉक्टरीज के सवाल पूछे गए। इसके साथ ही उनसे निर्भया मामले में दी गई फांसी पर भी सवाल पूछा गया था।

ताऊ से जज बनने की मिली प्रेरणा : दिव्यम चौधरी

बरेली की फरीदपुर तहसील के युवा दिव्यम चौधरी भी झारखंड में जज बन गए। दिव्यम के अनुसार ताऊ प्रदीप सक्सेना जज थे। उन्हीं की प्रेरणा से बचपन में ही जज बनने के सपने बुने। पिता अशोक चौधरी बिजनेसमैन हैं जबकि मां संगीता चौधरी टीचर हैं। दिव्यम ने लॉ कॉलेज से बीए एलएलबी पास किया। इसके बाद एसआरएमयू लखनऊ से एलएलबी की परीक्षा पास की। दिव्यम ने बताया कि उनका सपना अपने ताऊ की तर्ज पर पहले से ही जज बनने का था। ताऊ के अलावा उनके नाना (वकील) ने भी प्रेरित किया। शनिवार को लॉ कॉलेज देहरादून में दिव्यम का स्वागत किया गया।

ऐसे की तैयारी
सबसे पहले आईपीसी, सीआरपीसी के सभी सेक्शन पढ़े और समझे। आईपीसी और सीआरपीसी की धाराओं का कंपैरिजन किया। इसके बाद लिखने की प्रैक्टिस की। जितने भी केस और धाराएं थीं, उन्हें लिखकर तैयारी की। दिव्यम ने कहा कि तैयारी करने वाले युवाओं को जल्दबाजी में नहीं आना चाहिए। 

इंटरव्यू में यह पूछे गए थे सवाल
गैर इरादतन हत्या और मर्डर के बीच के अंतर पर सवाल पूछे गए। इसके अलावा सीपीसी में एक्स पार्टी डिक्री यानी एक पक्षीय आदेश पर सवाल पूछे गए। इसके साथ ही एलएलबी से जुड़े सवाल पूछे गए।
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जज बनकर नेहा ने पूरा किया पिता का सपना

झारखंड के धनबाद की नेहा झा ने जज बनकर पिता का सपना पूरा किया है। नेही ने रांची से ग्रेजुएशन करने के बाद लॉ कॉलेज से एलएलबी की। नेहा के पिता बीके झा बिजनेसमैन और मां मीना झा गृहिणी हैं। नेहा ने बताया कि उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई केवल जज बनने के लिए ही की थी। वह कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस नहीं करना चाहती थीं। लिहाजा, इसी हिसाब से अपनी तैयारी की और आज कामयाबी मिली। उन्होंने मध्य प्रदेश में पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा तक का सफर तय किया था।

ऐसे करें तैयारी
न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता पाने के लिए बेयर एक्ट और आईपीसी, सीआरपीसी के सेक्शन पर कमांड सबसे ज्यादा जरूरी है। आप जिस राज्य की परीक्षा देने की तैयारी में हैं, वहां के राज्य स्तर के एक्ट को भी पढ़ना होगा। मेन परीक्षा में जितने ज्यादा पूर्व के अदालती आदेशों का हवाला देंगे, उतना ही बेहतर होगा। लिहाजा, केस स्टडी की ज्यादा से ज्यादा जानकारी लेनी चाहिए। बाकी खुद पर भरोसा रखें, सफलता निश्चित है।
इंटरव्यू में यह पूछे गए सवाल
हिंदू लॉ में तलाक के क्या-क्या आधार बन सकते हैं। आपसी सहमति से तलाक कब दिया जाता है। झारखंड रेंट कंट्रोल एक्ट के साथ ही संविधान और एविडेंस से जुड़े सवाल पूछे गए।
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