बरेली की फरीदपुर तहसील के युवा दिव्यम चौधरी भी झारखंड में जज बन गए। दिव्यम के अनुसार ताऊ प्रदीप सक्सेना जज थे। उन्हीं की प्रेरणा से बचपन में ही जज बनने के सपने बुने। पिता अशोक चौधरी बिजनेसमैन हैं जबकि मां संगीता चौधरी टीचर हैं। दिव्यम ने लॉ कॉलेज से बीए एलएलबी पास किया। इसके बाद एसआरएमयू लखनऊ से एलएलबी की परीक्षा पास की। दिव्यम ने बताया कि उनका सपना अपने ताऊ की तर्ज पर पहले से ही जज बनने का था। ताऊ के अलावा उनके नाना (वकील) ने भी प्रेरित किया। शनिवार को लॉ कॉलेज देहरादून में दिव्यम का स्वागत किया गया।
ऐसे की तैयारी
सबसे पहले आईपीसी, सीआरपीसी के सभी सेक्शन पढ़े और समझे। आईपीसी और सीआरपीसी की धाराओं का कंपैरिजन किया। इसके बाद लिखने की प्रैक्टिस की। जितने भी केस और धाराएं थीं, उन्हें लिखकर तैयारी की। दिव्यम ने कहा कि तैयारी करने वाले युवाओं को जल्दबाजी में नहीं आना चाहिए।
इंटरव्यू में यह पूछे गए थे सवाल
गैर इरादतन हत्या और मर्डर के बीच के अंतर पर सवाल पूछे गए। इसके अलावा सीपीसी में एक्स पार्टी डिक्री यानी एक पक्षीय आदेश पर सवाल पूछे गए। इसके साथ ही एलएलबी से जुड़े सवाल पूछे गए।
झारखंड के धनबाद की नेहा झा ने जज बनकर पिता का सपना पूरा किया है। नेही ने रांची से ग्रेजुएशन करने के बाद लॉ कॉलेज से एलएलबी की। नेहा के पिता बीके झा बिजनेसमैन और मां मीना झा गृहिणी हैं। नेहा ने बताया कि उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई केवल जज बनने के लिए ही की थी। वह कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस नहीं करना चाहती थीं। लिहाजा, इसी हिसाब से अपनी तैयारी की और आज कामयाबी मिली। उन्होंने मध्य प्रदेश में पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा तक का सफर तय किया था।
ऐसे करें तैयारी
न्यायिक सेवा परीक्षा में सफलता पाने के लिए बेयर एक्ट और आईपीसी, सीआरपीसी के सेक्शन पर कमांड सबसे ज्यादा जरूरी है। आप जिस राज्य की परीक्षा देने की तैयारी में हैं, वहां के राज्य स्तर के एक्ट को भी पढ़ना होगा। मेन परीक्षा में जितने ज्यादा पूर्व के अदालती आदेशों का हवाला देंगे, उतना ही बेहतर होगा। लिहाजा, केस स्टडी की ज्यादा से ज्यादा जानकारी लेनी चाहिए। बाकी खुद पर भरोसा रखें, सफलता निश्चित है।
इंटरव्यू में यह पूछे गए सवाल
हिंदू लॉ में तलाक के क्या-क्या आधार बन सकते हैं। आपसी सहमति से तलाक कब दिया जाता है। झारखंड रेंट कंट्रोल एक्ट के साथ ही संविधान और एविडेंस से जुड़े सवाल पूछे गए।