जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि देश के मुसलमानों को अब बाबर का नाम नहीं लेना चाहिए। राम जन्मभूमि को बाबरी मस्जिद बताना गलत है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद पहले ही निर्णय दे चुका है कि जहां रामलला विराजमान हैं वह स्थान श्रीराम का जन्म स्थल है।
बृहस्पतिवार को शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से वार्ता में स्वरूपानंद ने कहा कि बाबर के सिपहसालार मीरबाकी द्वारा अयोध्या में मस्जिद बनाने का कोई साक्ष्य नहीं मिलता। इस निर्णय पर अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगना बाकी है।
दुर्भाग्य का विषय है कि मुसलमान अब भी राम जन्मभूमि को बाबरी मस्जिद कहकर पुकार रहे हैं। शंकराचार्य ने कहा कि हम मुसलमानों के विरोधी नहीं है। धर्म के आधार पर उनके साथ अन्याय भी नहीं करना चाहते।
तथ्य यह है कि मुगलों के शासन में न केवल हिंदुओं पर अत्याचार हुए अपितु उनके उपासना स्थल भी नष्ट किए गए। हालांकि आज के मुसलमानों का इस कार्य में कोई योगदान नहीं था। झगड़ा केवल इतना है कि आज के मुसलमान हिंदुओं पर किए अत्याचारों का विरोध नहीं करते।
मुसलमान करें मंदिर का समर्थन, न्यायालय दे चुका आदेश
स्वरूपानंद ने कहा कि राम जन्मभूमि का मसला न्यायालय ने साफ कर दिया है। अब इस पर कोई राजनीति नहीं करनी चाहिए। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा हिंदू धर्माचार्य मंदिर निर्माण प्रारंभ कर देंगे।
उन्होंने मुसलमानों से आग्रह किया कि वह अतीत में न रहकर वर्तमान में जीना सीखें। न्यायालय ने बाबर के आने और मस्जिद बनाने की बात जब खारिज कर दी है तब मुसलमानों को भी रामलला के जन्म स्थल पर मंदिर बनाने का समर्थन करना चाहिए।
राज्यसभा में पास होने की जरूरत नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान गलत है कि राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण वे राम मंदिर का प्रश्न सदन में पारित नहीं करवा सकते। राम मंदिर बनाने का आदेश न्यायालय दे चुका है। इसके लिए अब किसी प्रस्ताव को लोकसभा या राज्यसभा में लाकर पारित कराने की जरूरत नहीं है।
ज्ञानदास को कहा, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नहीं
स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीमहंत ज्ञानदास अब अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नहीं हैं। उनकी अध्यक्षता वाली परिषद को निरस्त किया जा चुका है। सभी अखाड़ों ने मिलकर प्रयाग के नरेंद्रानंद गिरि को उज्जैन में असली अध्यक्ष चुन लिया था। ज्ञानदास का परिषद से केवल सदस्य तक का रिश्ता रह गया है।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि आने वाले कुंभ मेलों के स्नान नरेंद्रानंद गिरि की अध्यक्षता में संपन्न होंगे। मेला प्रशासनों का दायित्व है कि वे ज्ञानदास की कथित परिषद का संज्ञान न लें।
स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि उनके जीवन के अब चार मकसद रह गए हैं। गंगा, राम मंदिर, गीता और गो हत्या बंद करने के क्षेत्र में वे काम करेंगे। शंकराचार्य से जुड़ी दोनों पीठों का मान-सम्मान बढ़ाया जाएगा। शंकराचार्य शुक्रवार को बदरीनाथ रवाना होंगे।
कई बौद्ध आज बनेंगे हिंदू
शंकराचार्य के कनखल मठ में शुक्रवार को प्रात: छह बजे हिंदू धर्म में वापसी का कार्यक्रम शुरू होगा। शंकराचार्य ने बताया कि बौद्ध मठ से जुड़े कई लोग हिंदू धर्म में वापसी करेंगे।