खनन माफिया महिला की अगुवाई में श्यामपुर क्षेत्र के गांव बहारपीली में एक क्रशर पर धावा बोला गया।
आरोप है कि क्रशर कर्मचारियों पर कई राउंड फायरिंग भी की गई। पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी महिला की अगुवाई में पहुंचे माफिया फरार हो गए। मौके से दो कारें और एक ट्रैक्टर ट्राली कब्जे में ली गई।
घटना सोमवार देर रात की बताई जा रही है। बहारपीली के एक स्टोर क्रशर मालिक का खनन के धंधे में जुडे़ दूसरे पक्ष से विवाद चल रहा है। दूसरे गुट का नेतृत्व एक महिला करती हैं।
कर्मचारियों में मच गई अफरातफरी
आरोप है कि देर रात महिला अपने समर्थकों के साथ क्रशर पर जा धमकी और क्रशर स्वामी पर दबाव डालने के लिए कई राउंड फायरिंग कर दी।
इससे क्रशर कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई। कई जान बचाकर भागे। सूचना पर श्यामपुर एसओ राजीव रौथाण पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। लेकिन तब तक महिला एवं उसके समर्थक दो कारें छोड़कर फरार हो गए।
पुलिस ने दोनों कारों और एक ट्रैक्टर-ट्राली मौके से कब्जे में लिया है। क्रशर स्वामी ने पुलिस को तहरीर देने की बात कही है। लेकिन पुलिस का कहना है उन्हें तहरीर नहीं मिली।
एसओ राजीव रौथाण ने बताया कि फायरिंग नहीं हुई है। खनन को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा है, दोनों कारें और ट्रैक्टर ट्राली लावारिस में दाखिल की गई हैं। पुलिस हर पहलु की जांच में जुट गई है।
रक्तरंजित न हो जाए अवैध खनन का खेल
खनन के खेल में हरिद्वार की भूमि लहू से लाल होती रही है। लेकिन संगठित तरीके से पहली बार सोमवार को खनन के धंधे में वर्चस्व को लेकर धावा बोला गया।
शुक्र है कई राउंड चली गोलियों की चपेट में कोई नहीं आया। लेकिन सोमवार को घटी घटना भविष्य के लिहाज से सही संकेत नहीं हैं। खनन के मलाईदार खेल में गंगातट पर बसे हर गांव का दूसरा आदमी परोक्ष-अपरोक्ष रुप से जुड़ा हुआ है।
खनन माफियाओं का एक मजबूत नेटवर्क जिले में है। इसमें सिस्टम भी शामिल है। किसी खनन माफिया को खद्ददरधारी का संरक्षण प्राप्त है तो कही खद्दरधारी सीधे तौर पर धंधे से जुडे़ हैं।
धंधे में वर्चस्व को लेकर खद्दरधारी भी आमने सामने आ चुके हैं। लक्सर में इस खेल में एक युवक को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। आए दिन होने वाली छोटी-छोटी मारपीट आम बात है।
खनन के धंधे पर एकाधिकार को लेकर जंग
सरकारी कर्मचारी भी खनन रोकने की कथित कोशिश में कई बार पीटे हैं। सोमवार को बहारपीली में जिस ढंग से खनन के धंधे पर एकाधिकार को लेकर जंग की शुरुआत हुई वह ठीक नहीं हैं।
जैसा की बताया गया कि अंधाधुध चली गोलियों में कोई हताहत भी हो सकता है। लेकिन सिस्टम, भविष्य में मंडरा रहे खतरे के बादल को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
शासन-प्रशासन के ढुलमुल रवैये की वजह से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। यदि सिस्टम की आंखें नहीं खुली तो इस खेल को रक्तरंजित होने से कोई नहीं रोक सकता।