संस्कृति निदेशालय के सहयोग से अनाम संस्था की ओर से ‘हीरा बैल की आत्मकथा’ नाटक का मंचन किया गया। शनिवार को ग्राफिक एरा में नाटक का मंचन करते हुए कलाकारों ने एक गांव के ग्राम प्रधान की ओर से ग्रामीणों पर किए जा रहे शोषण को दर्शाया। इसके खिलाफ हीरा बैल ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आवाज उठाई।
नाटक के लेखक और निर्देशक डॉ. एहसान बख्श ने बताया कि नाटक के मंचन में प्रदेश भर के 17 कलाकारों ने हिस्सा लिया। इससे पहले सभी कलाकारों को दस दिवसीय कार्यशाला में थिएटर और अभिनय की बारीकियां सिखाई गईं। नाटक की कहानी कुमाऊं की एक लोक कथा पर आधारित थी। हीरा बैल बड़ा होकर अपने गांव की बदहाल व्यवस्था को बदलने के साथ ग्राम प्रधान के खिलाफ आवाज उठाता है और गांव में फैली अव्यवस्था को ठीक करता है। इस नाटक में लोक-कलाओं के साथ-साथ मॉडर्न एक्टिंग और नयी तकनीकों का प्रयोग किया गया। नाटक में मैत्रिय घोषाल, आर्या भट्ट, सुनील सिंह, सम्राठ सिंह, शैलेश पैनोली, जितेश धवन, विजय कुमार, हिमांशु, गिरजा, दीया सकलानी, शुभां घोषाल ने मुख्य भूमिका निभाई।