राज्यसभा चुनाव में प्रदीप टम्टा की जीत से मुख्यमंत्री हरीश रावत सियासी संकट के चक्र व्यूह का आखिरी द्वार तोड़ने में सफल रहे हैं।
इस पूरे सियासी संकट के दौरान मुख्यमंत्री रावत को दोहरे हमलों का सामना करना पड़ा है। एक तरफ विपक्ष भाजपा रही तो दूसरी तरफ कांग्रेस के अंदर का विरोध रहा है। अब विधानसभा चुनाव में उतरने के पहले उनके सामने घोषणाओं को पूरा करना रह गया है। रणनीतिकारों का कहना है कि खस्ताहाल वित्तीय स्थिति में घोषणाएं पूरी करना बड़ी चुनौती है।
सियासी संकट की शुरुआत विनियोग बिल के दौरान सदन में मत विभाजन की मांग से शुरू हुई थी। इस दौरान भाजपा मुख्यमंत्री रावत पर हमलावर रही और कांग्रेस के नौ विधायकों ने बगावत कर दी। बागी विधायक दूसरों को भी तोड़ने में लग गए।