फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरीश रावत की सियासत से उत्तराखंड में चमकी कांग्रेस

Sun, 12 Jun 2016 11:39 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला
विज्ञापन
राज्यसभा चुनाव में प्रदीप टम्टा की जीत से मुख्यमंत्री हरीश रावत सियासी संकट के चक्र व्यूह का आखिरी द्वार तोड़ने में सफल रहे हैं।
विज्ञापन


इस पूरे सियासी संकट के दौरान मुख्यमंत्री रावत को दोहरे हमलों का सामना करना पड़ा है। एक तरफ विपक्ष भाजपा रही तो दूसरी तरफ कांग्रेस के अंदर का विरोध रहा है। अब विधानसभा चुनाव में उतरने के पहले उनके सामने घोषणाओं को पूरा करना रह गया है। रणनीतिकारों का कहना है कि खस्ताहाल वित्तीय स्थिति में घोषणाएं पूरी करना बड़ी चुनौती है।

सियासी संकट की शुरुआत विनियोग बिल के दौरान सदन में मत विभाजन की मांग से शुरू हुई थी। इस दौरान भाजपा मुख्यमंत्री रावत पर हमलावर रही और कांग्रेस के नौ विधायकों ने बगावत कर दी। बागी विधायक दूसरों को भी तोड़ने में लग गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

विजयश्री हासिल करने में रावत कामयाब रहे

सीबीआई मुख्यालय पर हरीश रावत - फोटो : पीटीआई
सियासी संकट का चक्रव्यूह सख्त हो गया और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया। लेकिन, कोर्ट के आदेश के बाद फ्लोर टेस्ट में विजयश्री हासिल करने में रावत कामयाब रहे। इस पूरे प्रकरण में भाजपा को शिकस्त मिली। राज्यसभा चुनाव में प्रदीप टम्टा को टिकट मिलने से कांग्रेस में फिर विरोध के स्वर गूंजने लगे।

भाजपा इस विरोध को कैश कराने में जुट गई। इस बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय विरोध में उतर आए। फ्लोर टेस्ट की तरह राज्यसभा चुनाव में भी रावत की साख दांव पर लगी। दोतरफा हमले होते रहे। टम्टा की जीत से सियासी चक्रव्यूह का आखिरी द्वार टूटा, लेकिन विपक्ष के तरकश में अभी सीएम घोषणाओं का तीर बाकी है।

अगर घोषणाएं पूरी नहीं हुईं तो विपक्ष विधानसभा चुनाव में इनका इस्तेमाल कर सकता है। बजट और समय की कमी के बीच घोषणाएं पूरी करने की मुख्यमंत्री रावत के सामने चुनौती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें