तस्करों से मिलीभगत सामने आने के बाद गिरफ्तार किए गए ज्वालापुर कोतवाली और नारकोटिक्स सेल में तैनात दो सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, इस मामले में ज्वालापुर कोतवाल प्रवीण सिंह कोश्यारी पर भी गाज गिरी है। उनको लाइन हाजिर करते हुए चंद्र चंद्राकर नैथानी को कोतवाली की कमान सौंपी गई है। वहीं, सीओ मंगलौर पूरे मामले की जांच करेंगे।
शुक्रवार को ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ले में एसटीएफ देहरादून की टीम ने दबिश देते हुए चार तस्करों इरफान, सत्तार, गंगे और राहिल को गिरफ्तार किया था। उन्हें संरक्षण देने वाले ज्वालापुर कोतवाली में तैनात सिपाही अमजद और नारकोटिक्स सेल में तैनात सिपाही शाहिद राजा को भी गिरफ्तार किया गया था।
मामले का खुलासा होने के बाद शनिवार को हरिद्वार एसएसपी डी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने भी अपनी तरफ से कार्रवाई करते हुए ज्वालापुर कोतवाल प्रवीण सिंह कोश्यारी को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं, दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर कोतवाली की कमान चंद्र चंद्राकर नैथानी को दी गई है।
एसएसपी ने अपनी तरफ से भी इस मामले में जांच के आदेश देते हुए सीओ मंगलौर पंकज गैरोला को जांच सौंपी है। कप्तान का कहना है कि लाइन हाजिर किए गए कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी की प्राथमिक तौर पर कोई संलिप्तता सामने नहीं आई है। मगर जांच में दिक्कत न हो, इस कारण इंस्पेक्टर को हटाया गया है। सीओ मंगलौर मामले की जांच करेंगे।
पुलिस संरक्षण में चल रहा था गैंग
गैंग लीटर सत्तार ने बताया कि उनका पूरा धंधा ज्वालापुर थाने में तैनात सिपाही अमजद अैर एंटी ड्रग्स फोर्स में तैनात सिपाही रईस राजा के संरक्षण में चलता था। जब भी थाना स्तर से कोई कार्रवाई होती। अमजद उन्हें सूचना देता था, जबकि जब भी एसटीएफ की कोई कार्रवाई होती थी तो एंटी ड्रग्स फोर्स में तैनात रईस राजा सूचना दे देता था। इसके लिए दोनों सिपाहियों को अच्छी-खासी रकम दी जाती थी।
होनी थी 15 किलो स्मैक की डील
तस्करों की बहुत जल्दी ही 15 किलो स्मैक की डील होने वाली थी। इसके लिए राहिल ने पथरी क्षेत्र में रहने वाले इरफान से बातचीत की थी। इसका पैसा गैंग लीडर सत्तार की ओर से दिया जाना था। डील होने पर गैंग की ओर से इसे अलग-अलग जगह पहुंचाया जाना था।