अखाड़े हिंदू धर्म की रक्षा और सनातन धर्म के प्रचार के लिए स्थापित किए गए थे। मौजूदा समय में 13 प्रमुख अखाड़े विद्यमान हैं। इनका अपने अलग ध्वज, परंपरा और कुल गुरु हैं। सदियों से अखाड़ों के प्रमुख ब्राह्मण-क्षत्रिय जाति के सवर्ण संत बनते रहे हैं। लेकिन वक्त की जरूरत और संवैधानिक निर्देशों को देखते हुए अखाड़ों ने भी सोशल इंजीनियरिंग की कवायद शुरू कर दी है।
हालांकि संन्यासी बनते ही किसी भी व्यक्ति का जाति, वर्ण सबकुछ गौण हो जाता है। अपनी अंत्येष्टि करके व्यक्ति संन्यासी होता है। लेकिन बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के संतों को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान करना सनातन संस्कृति के विकासगामी सोच का परिचायक है। उल्लेखनीय यह भी है कि एक स्वर से अनुसूचित जाति के संतों को महामंडलेश्वर बनाने का स्वागत भी किया जा रहा है।
आवेदन और इतने बनेंगे महामंडलेश्वर
- अनुसूचित समाज से 250 आवेदन, 10 बनेंगे
- वैश्य समाज से 100 आवेदन, तीन बनेंगे
- ब्राह्मण समाज से 700 आवेदन और पांच बनेंगे
- राजपूत समाज से 400 आवेदन, पांच बनेंगे
- जो सुबह तीन बजे बिस्तर छोड़ता हो
- जो सनातन धर्म का पालन और मूर्ति उपासक हो
- जो संन्यास की अवधि नहीं गुण-दोष का आधार बनेगा
- जो अनाथ बच्चों को गोद लेकर उनका भरण पोषण करता हो
देशभर से 1450 संतों के महामंडलेश्वर पद के लिए आवेदन हुए हैं। महामंडलेश्वर अखाड़े का सबसे गरिमापूर्ण पद है। आवेदकों के गुण-दोष के आधार पर मूल्यांकन होगा। 23 महामंडलेश्वर बनाए जाने हैं। ताजपोशी के बाद उनकी सक्रियता के आधार पर जूना अखाड़े की ओर से वाहन के अलावा जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। सनातन धर्म के प्रचार प्रसार करने वाले महामंडलेश्वरों के क्षेत्र में वहां की जनता के लिए सड़क, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
- श्रीमहंत हरिगिरी, अंतरराष्ट्रीय संरक्षक, जूना अखाड़ा