आईएएस अधिकारी हरबंश सिंह चुघ गए तो थे प्रशासनिक कुशलता के सबक सीखने लेकिन लौटे तो उत्तराखंड के कृषि मंत्री ने उन्हें असल प्रशासन का पाठ पढ़ा दिया।
आईएएस अधिकारी को काम करने से रोका
हनक मंत्री के तौर पर पहचान बनाने वाले हरक सिंह (कृषि मंत्री) ने उन्हें उनके पद पर काम करने से ही रोक दिया। यह अफसर हफ्ते भर तक काम की तलाश में भटकता रहा और बाद में उन्हें लखनऊ चलता कर दिया गया।
कृषि विभाग में डेपुटेशन पर चहेतों को एडजस्ट करने में जुटे मंत्री को चुघ चुभ इसलिए रहे थे कि उन्हें स्थायी आदमी चाहिए और इस पद पर लगातार ट्रांसफर हो रहे हैं। वाकया 12 दिसंबर का है।
पद पर मंत्री के चहेते को बैठा दिया
आईएएस हरबंश सिंह चुघ मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अकादमी से दो महीने की ट्रेनिंग हासिल करने के बाद जब बतौर कृषि मंडी निदेशक व एमडी तराई बीज विकास निगम (टीडीसी) के तौर पर अपना काम शुरू करने पहुंचे तो ऊपर से आए एक फोन ने उन्हें काम शुरू करने से रोक दिया।
फिर हरक सिंह ने औद्यानिकी विवि में डीन पीएस बिष्ट को इस पद पर डेपुटेशन पर ज्वाइन करा दिया। बिष्ट मंत्री के चहेते बताए जा रहे हैं। चुघ को पदमुक्त करने के इस तरीके पर अधिकारियों ने ऐतराज जताया है।
नियमानुसार ट्रेनिंग या छुट्टी से लौटे किसी भी अधिकारी को अपने मूल पद पर पुन: ज्वाइन करने से नहीं रोका जा सकता। चुघ सप्ताह भर खाली घूमते रहे और अब उन्हें पुनर्गठन आयुक्त बनाकर लखनऊ भेजा गया है। मंत्री के इस फैसले से एक नई परंपरा और पड़ गई।
टीडीसी के एमडी पद पर पहली बार किसी गैर आईएएस को तैनात किया गया है।
डेपुटेशन पर हरक की हनक
- दो साल पहले खंड शिक्षा अधिकारी दमयंती रावत को प्रतिनियुक्ति पर लाकर बीज प्रमाणीकरण एजेंसी का निदेशक बनाया।
- लक्ष्मी राणा को जैविक उत्पाद परिषद में उपाध्यक्ष बनाया।
- अपने रिश्तेदार शिक्षक यशवंत सिंह बर्त्वाल को कृषि निदेशालय में डेपुटेशन पर सहायक निदेशक बना दिया।