कर्णप्रयाग में जूनियर हाईस्कूल डुंग्री-जसपुर का अपना भवन आठ माह से निर्माणाधीन है। स्कूल अपने मूल स्थान से आधा किमी दूर शैलेश्वर में एक निजी मकान में चल रहा है। अब मकान मालिक मकान खाली कराने का दबाव बना रहा है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि डुंग्री से स्कूल शैलेश्वर आ गया, अब शैलेश्वर से कहां जाएं। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
बच्चों को परेशानी
मई 2013 में स्कूल भवन निर्माण के लिए शासन से 5 लाख 46 हजार की स्वीकृति मिली थी। निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह रावत का कहना है कि स्कूल दूर होने से बच्चों को खासी परेशानी हो रही है। खास तौर पर जसपुर से आने वाले छात्र-छात्राओं को दो किमी की दूरी तय कर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।
अक्तूबर से बंद है काम
प्रधानाध्यापक राजेंद्र प्रसाद के अनुसार स्कूल भवन निर्माण के लिए केवल 2 लाख 73 हजार रुपये निर्गत हो पाए हैं। ठेकेदार ने छत तक निर्माण अक्तूबर माह में पूरा कर लिया था। तब से काम बंद है। निजी भवन स्वामी द्वारा मकान खाली करने पर यहां पढ़ रहे 18 बच्चों को कहां शिफ्ट किया जाए समस्या बना है।
इधर बीईओ टीपी नौटियाल ने कहा कि शासन से निर्माण की तीसरी किश्त न मिलने से समस्या हुई है। लगातार पत्राचार कर धनराशि अवमुक्त करने की मांग की जा रही है।
आंगन बना भवन के लिए खतरा
ब्लाक के डुंग्री-जसपुर का आंगन जून माह की आपदा में क्षतिग्रस्त होने से स्कूल भवन इसकी जद में आ गए। यदि आंगन की मरम्मत समय पर नहीं कराई जाती तो आने वाली बरसात में भवन ढह सकता है।
लंगूर और भालू बने मुसीबत
दो किमी जंगल का रास्ता तय कर छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों पर जहां लंगूर हमला कर रहे हैं वहीं भालू का आंतक भी है। ग्रामीण गबर सिंह रावत के अनुसार पिछले सप्ताह तीन महिलाओं पर भालू ने हमला कर दिया था। ऐसे में बच्चों को दूर स्कूल भेजने में ग्रामीण डर रहे हैं।