गंगा के आस्तित्व पर खतरा
अपर अलकनंदा घाटी के छोटे ग्लेशियरों के साथ-साथ पूर्व-पश्चिम दिशा में बहने वाले ग्लेशियरों पर तापमान वृद्धि का असर सर्वाधिक पड़ा। विशेषज्ञों की मानें तो मानवीय हस्तक्षेप के चलते ग्लेशियर प्रभावित हो रहे हैं। जिससे कि गंगा के आस्तित्व पर खतरा है।
1994-2020 तक सर्वाधिक घटे ग्लेशियर
भू-विशेषज्ञों के करीब ढाई दशक तक किए गए शोध बताते हैं कि 1994 से लेकर 2020 तक हिमालय के ग्लेशियरों की पिघलने की दर सबसे अधिक रही। इस अवधि में ये करीब 13 मीटर प्रति वर्ष पीछे खिसक गए। इतना ही नहीं पिछले तीन दशकों में मध्य हिमालय व उसके आसपास के तापमान में 0.1 से 0.15 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से वृद्धि हुई। जबकि इसी अवधि के दौरान बारिश में भी लगातार कमी दर्ज की गई है।
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इन वैश्विक संस्थानों ने किया शोध
एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि श्रीनगर के भूविज्ञान विभाग के एचओडी प्रो. एचसी नैनवाल ने बताया कि 1994- 2020 तक मध्य हिमालय में स्थित यूएबी (ऊपरी अलकनंदा बेसिन) में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग दिल्ली की ओर से वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत ग्लेशियरों का अध्ययन किया गया। जिसमें गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ- साथ स्विट्जरजलैंड के ज्यूरिख विवि और गणितीय विज्ञान संस्थान चेन्नई के विशेषज्ञों ने भी शोध में अपना योगदान दिया। बताया कि इस शोधकार्य को लंदन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका जर्नल ऑफ ग्लेशियोलाॅजी में प्रकाशित किया गया है।