केदारनाथ में बेमौसम में हो रही तेज बर्फबारी
वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 शीतकाल में केदारनाथ में अपेक्षाकृत बहुत कम बर्फबारी हुई है। वर्ष 2022-23 में बरसात के बाद सितंबर, अक्तूबर से लेकर दिसंबर में यहां नाममात्र की बर्फबारी हुई थी। बीते वर्ष जनवरी में गिनती के पांच दिन ही बर्फ गिरी थी। जबकि मई से जून तक यहां 21 दिन लगातार बर्फबारी हुई। इस दौरान यात्रा भी व्यापक प्रभावित हुई थी। इस वर्ष भी हालात बीते वर्ष जैसे हैं। बीते वर्ष 15 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद से दिसंबर तक यहां गिनती के दिन बर्फबारी हुई। जबकि इस जनवरी में भी दो दिन ही हल्की बर्फ गिरी। इससे पहले वर्ष 2016 से 2018 तक शीतकाल में केदारनाथ में जमकर बर्फबारी हुई थी। वर्ष 2018-19 में शीतकाल में केदारनाथ में 64 फीट से अधिक बर्फ गिरी थी।
बर्फबारी नहीं होने से बढ़ेगा तापमान
हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विवि के उच्च शिखरीय पादप शोध संस्थान के निदेशक डाॅ. विजयकांत पुरोहित का कहना है कि, हिमालय क्षेत्र में सर्दियों में बर्फबारी नहीं होने से फरवरी से ही निचले इलाकों में तापमान बढ़ सकता है। जिससे ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगेंगे और नदियों का जलस्तर मार्च-अप्रैल में ही बढ़ने लगेगा। इसका असर हिमालय के उच्च व मध्य क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोतों और बुग्यालों पर भी पड़ेगा।
सर्दियों में जितनी तेज बर्फ गिरेगी, ग्लेशियर उतना ही मजबूत होंगे। लेकिन बीते दो वर्षों से ऐसा नहीं हो रहा है। फरवरी के बाद होने वाली बर्फबारी का ग्लेशियरों को ज्यादा लाभ नहीं मिलता है। बल्कि इससे हिमस्लखन की घटनाएं बढ़ती हैं। वर्ष 2022 व 2023 में केदारनाथ क्षेत्र में बेमौसम की तेज बर्फबारी के कारण ही चोराबाड़ी क्षेत्र में हिमस्लखन की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
- डाॅ. मनीष मेहता, वरिष्ठ वैज्ञानिक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी संस्थान, देहरादून